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	<title>&#34;कुरुक्षेत्र&#34;</title>
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		<title>&#34;कुरुक्षेत्र&#34;</title>
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		<title>I Love You ,,,,कुछ खट्टा कुछ मीठ्ठा</title>
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		<pubDate>Sun, 04 Jul 2010 23:18:02 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[हास्यरस]]></category>

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		<description><![CDATA[ I Love You ,,,,कुछ खट्टा कुछ मीठ्ठा  मुझे एक दिन जोब पर  मजाक करने का मन हुआ। एक मित्रने उसके घर फोन किया किसी काम के लिए। मै जरा मजाकके मुडमें था। मित्रका नाम प्रदीप पटेल, ४६ सालके, बरोडा(गुजरात) के नजदीकके गांवके है। मेंने पूछाः घर पे फोन करते हो वाइफ को? उन्होंने कहाः हां। &#8216;फोन में बात पूरी [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=66&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div> I Love You ,,,,कुछ खट्टा कुछ मीठ्ठा <br />
मुझे एक दिन जोब पर  मजाक करने का मन हुआ। एक मित्रने उसके घर फोन किया किसी काम के लिए। मै जरा मजाकके मुडमें था। मित्रका नाम प्रदीप पटेल, ४६ सालके, बरोडा(गुजरात) के नजदीकके गांवके है।<br />
मेंने पूछाः घर पे फोन करते हो वाइफ को?<br />
उन्होंने कहाः हां।<br />
&#8216;फोन में बात पूरी हो जाए तब I Love You कहेना&#8217; ।<br />
&#8216;फिर तो पूरी रात सो नहीं पाएगी&#8217;॥<br />
&#8216;ऐसा क्युं?<br />
&#8216;२० साल हो गए पहेलीबार I Love You सुनेगी तो उसे पूरी रात नींद नहीं आयेगी&#8217;।<br />
सब लोग खूब हंसने लगे| वो कहेने लगे मेंने २० सालमें कभी भी ऐसा कहा ही नहीं है। तो मैने पूछा की वाइफने तो एसा आपको कहा होगा ना? तो कहेने लगे उसने भी कभी नहीं कहा है॥ मेंने फिर पूछा किसी गर्लफ्रेन्ड को तो कहा होगा ना? तो कहा की गर्लफ्रेन्डको तो बहुतबार कहा था। पर वो पत्नी नहीं हुइ थी। दूसरेकी पत्नी बन गइ।<br />
दूसरे एक ५५ सालके मित्र ज्योतिन्द्र पटेल को सवाल किया। दादा दोडके! आपने कभी I Love You अपनी वाइफको कहा है? वो ज्यादा एनर्जेटिक है इसलिए हम उन्हें दादा दोडके कह के  के मान देते है।<br />
&#8216;इसमें क्या कहेना?&#8217;<br />
&#8216;कोइ दिन तो कहा होगा ना?&#8217;<br />
नहीं कभी नहीं सब जानते है वो मेरी वाइफ है और में उसका घरवाला &#8216;।<br />
&#8216;आप भी ना कैसे हो?&#8217;<br />
&#8216;इसमें क्या है  उसे पता है की में उसे छोडके कहीं नहीं जानेवाला और जाउंगा तो वापस आनेवाला ही हुं, वो मुझे प्रेम करती है और में उसे प्रेम करता हुं उसमें  क्या कहेना?&#8217;<br />
फिरसे सब हंसे। दूसरे एक भाइने कहा उनकी वाइफको पता है कि ये खोटा सिक्का है कहींनही चलनेवाला वापस ही आएगा। एक नया लडका है २३ सालका सचीन पटेल  मैंने उसे पूछा, सचीन कितने साल हुए शादी को?<br />
&#8216;दो साल&#8217;<br />
&#8216;अमरिका आए कितने टाइम हुआ?<br />
&#8216;सिर्फ पांच महिने हुए है&#8217;<br />
&#8216;आपने कभी वाइफ को I Love You कहा है?&#8217;<br />
&#8216;कहा है बहुत बार कहा है पर यहां की वाइफ का कोइ विश्वास नहीं&#8217;<br />
&#8216;अरे भाइ क्युं एसा कहेता है?&#8217;<br />
&#8216;अरे भाइ मेरी वाइफ २० साल से यहां रहेती है। यहां की लडकीयोंका क्या भरोसा? कब निकाल दे क्या पता&#8217;।<br />
सब लोग बहुत हंसे की पेटमें दर्द होने जैसा हुआ। सचिनकी खुदकी पेथोलोजीकल लेब थी। सब लोग कहेते है क्या लेने आया होगा यहां? पेड(देवादार अमेरिक) परसे हरी नोटो तोडने दूसरा क्या?<br />
दूसरे पीयूष पटेल है ४० सालके हुए कहेने लगे मेंने तो अभी शादी ही नहीं की इसलिए मुझे तो पूछना ही नहीं। बिना विसा के अमेरिकामें आये है इसलिए अब  भारत जा नहीं सकते है शादीके लिए, अगर शादीके लिए जाए तो वापस नहीं आ सकते। उमर बढती जाती है। कोइ लडकी पसंद नहीं आती या किसी लडकी को वो पसंद नहीं आते।<br />
और एक सतीश मास्तर है भरुचके वो भी लगभग ५५ साल के है कहेते है हमारे जमाने में कौन एसा कहेता था ? मैने कभी नहीं कहा। मैने कहा मास्तर कभी तो कहेना चाहिए ना? तो कहेने लगे यार इसमें क्या कहेना? मित्रो मेरा मजाकमें हुए इन्टरव्यु थोडेमें ज्यादा कहेता है। क्या कहेता है ये मेरे मित्र प्रतिभावके रूपमें कहे ऐसी आशा है।<br />
क्या पत्नीको I Love You कहेना चाहिए? कितने भी साल शादीको हुए हो फिर भी कहे सकते है? भले ही सारी रात नींद ना आये कहेनेमें क्या प्रोब्लेम?<br />
ये तो अच्छा हुआ किसीने मुझे ये सवाल नहीं पूछा।</div>
<br />Filed under: <a href='http://brsinhji11.wordpress.com/category/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%b8/'>हास्यरस</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/brsinhji11.wordpress.com/66/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/brsinhji11.wordpress.com/66/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/brsinhji11.wordpress.com/66/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/brsinhji11.wordpress.com/66/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/brsinhji11.wordpress.com/66/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/brsinhji11.wordpress.com/66/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/brsinhji11.wordpress.com/66/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/brsinhji11.wordpress.com/66/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/brsinhji11.wordpress.com/66/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/brsinhji11.wordpress.com/66/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/brsinhji11.wordpress.com/66/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/brsinhji11.wordpress.com/66/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/brsinhji11.wordpress.com/66/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/brsinhji11.wordpress.com/66/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=66&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>गुरु गुलामी!!!!५० लाख साधु? बापरे!! अधधध!!!</title>
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		<pubDate>Thu, 24 Jun 2010 20:15:14 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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		<description><![CDATA[ गुरु गुलामी!!!!५० लाख साधु? बापरे!! अधधध!!!          *गुलाम मानसिकताको लोग कोलोनियल माइन्ड कहेते है। अंग्रेज  २२० वर्ष भारत पर राज करके गये। इसलिए प्रजाकी मानसिकतामें अंग्रेजी  और अंग्रेजोकी प्रति गुलामी खूनमें आ गइ  है। पर गुरुगुलामी तो प्रजाके अचेतन मनमें समा गइ  है और संतानोको वारसेमें जीन्समें भी देते जाते है।                    किसीको कोइना कोइ गुरुके बगैर जैसे चलता ही नहीं। ईन्दिरा गांधी [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=63&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/06/images81.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-64" title="images[8]" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/06/images81.jpg?w=124&#038;h=93" alt="" width="124" height="93" /></a> गुरु गुलामी!!!!५० लाख साधु? बापरे!! अधधध!!!</div>
<div>         *गुलाम मानसिकताको लोग कोलोनियल माइन्ड कहेते है। अंग्रेज  २२० वर्ष भारत पर राज करके गये। इसलिए प्रजाकी मानसिकतामें अंग्रेजी  और अंग्रेजोकी प्रति गुलामी खूनमें आ गइ  है। पर गुरुगुलामी तो प्रजाके अचेतन मनमें समा गइ  है और संतानोको वारसेमें जीन्समें भी देते जाते है।</div>
<div>                   किसीको कोइना कोइ गुरुके बगैर जैसे चलता ही नहीं। ईन्दिरा गांधी हो या जवाहरलाल के गांधीजी या  किसी भी नेता, सब गुरुके पास आशीर्वाद और  सलाह लेनेके लिए दौड जाते है। दूसरे देशके नेता साधुओकी सलाह लेने नहीं जाते, इसलिए वो भारत से बलवान है, और आगे है। साधुओंकी सलाह लेके देशका भला कहां हुआ? देश तो हजार साल तक गुलाम ही रहा है, गरीब और कायर ही रहा है। भीखारीओंकी सलाह से कभी देश बलवान हो सकता है भला? जो मुर्ख होते है वो देशको चलाने के लिए साधू ओंकी सलाह लेने दौड जाते है। हा कोइ अपवाद हो शकटा  है, जैसे की चाणक्य। पर एसे अपवाद कितने? चंद्रगुप्तका साम्राज्य बलवान था क्योंकी चाणक्यने जासूसी संस्थाका महत्व समजाया था। राज्यके जासूस सीधे चाणक्यके पास माहिती देने  चले जाते थे| बाग्लादेशका १९७१में अस्तित्व हुआ उस युद्ध को आधा तो  भारतकी &#8216;रो&#8217; नामक जासूसी संस्था के कारण ही जीते थे। इस &#8216;रो&#8217; को छोटा करके लगभग निष्क्रिय बना देने का महापाप श्रेष्ठ जाने जाते मोरारजी देसाइने किया था। कच्छ जितना छोटा इजराएल  देश को कोइ नहीं दबा सकता इसका कारण उनकी जासूसी संस्था &#8216;मोसाद&#8217; है।<br />
 <br />
            सबको आशीर्वादसे काम चलाना  है। कोइ महेनत नहीं करनी, कर्मका नियम है की कर्मका फल मिलता ही है, कर्म भगवानको भी नहीं छोडते तो फिर आशीर्वादकी क्या जरूरत? अगर प्रार्थना किये  खराब कर्मो या की गइ भूलमेंसे मुक्तिके लिए करते हो तो फिर कर्म के नियम का क्या अर्थ ? बाकी प्रार्थना करते ही रहो कोइ फर्क नहीं पडेगा। भगवान महावीर इस कर्मके नियम को जानते थे, इसलिए जिंदगीमें कभी प्रार्थना नहीं  की थी। भारतमें लगभग ५० लाख साधु है एसा गुजराती दिव्यभास्करमें किसी आर्टीकलमें पढा था। जो ये सच्चा हो तो?<br />
        </div>
<div>                ये ५० लाख साधु कुछ काम नहीं करते|कीसी चीजका उत्पादन नहीं करते, ना ही कोइ सेवा बेचते है। मुफ्तमें प्रजाके पैसे से मजा करते है। एक साधू के पीछे कमसे कम हररोजके ५० रू. खर्च होता है ऐसा मान ले , क्यूंकी ये साधु भूखे नहीं रहेते है।  पैसे कौन देता होगा? ५० रू. से ज्यादा खर्च करते होगें क्योंकी बीडी और गांजेका खर्च कौन देता होगा? उनके खानेका, चायका, दूधका, भगवे वस्त्रका, फलाहार इन सबके लिए वो लोग तो कमाने जाते नहिं है। तो इनका रोजका सादा हिसाब भी गिने तो <span style="color:#ff0000;">एक साधुके पीछे ५० रू. के हिसाब से गिने तो ५० लाख साधुओंके पीछे हररोजके २५०० लाख रपिया हुआ। और सालके ३६५ दिनके ९१२५ करोड रूपिया खर्च होते होंगे।</span> ये तमामपैसे प्रजाकी जेबसे जाते है। ये हिसाब तो सीधे सादे फेमस नहीं है एसे साधुओंका खरच जो आम जनताके सिर पे आता खर्च है।जानेमाने गुरुओं तो जनताके करोडो रूपिया एंठते होगे, कुछ भी किये बिना। भारतकी इकोनोमीके लिए बोज है, ये साधू  संस्था। जो देशके विकासमें कोइ काममें नहीं आती। बिना साधुओंके देशका विकास अच्छा होगा, इकोनोमी सुधरेगी। जनता के महेनतके पैसे बचेगें.</div>
<div>               जिसको काम करना नहीं है वो ही भगवे वस्त्र पहेनके साधु बन जाते है। उनका काम हो गया उनको जिंदा रखनेके जिम्मेदारी जनताकी। बहोत  सारे लोग कहेते है की दो चार साधुके कारण सारी साधु संस्थाको बदनाम नहीं करना चाहिए। मेरा कहेना है की दो चार अच्छे साधुओंके कारन पूरी निष्क्रिय साधुसंस्था का बोज क्युं उठाना? स्वामी विवेकानंद जैसे सच्चे साधु और गुरु कितने? और जो सच्चे है वो तो संसारमें रहेके भी भक्ति कर शकते है। पूरा ॠषि जगत शादीशुदा थे। कितने को तो दो पत्नीआं भी थी| कोइ कोइका मानना है की ये साधुओंको स्त्रीआं विचलित करती है। पर विचलित हो जाए एसी साधुता किस कामकी? या फिर सत्रीओंकी भावनाओंको बहेलाके साधू  खुदकी दबाइ हुइ छूपि वासनाको संतोषते तो नही है ना?     <br />
      </div>
<div>                  एक ही रामकथा को बारबार कहे के करोडो ऋपिया जमा करनेवाले बापुओंकी कमी नहीं है ये देशमें। ज्यादा मंदिरो बनाके जनताके करोडो रुपिया पथ्थरोमें डालते है। एक सोमपुरा फेमिलीका भला करने के लिए बाकी जनताकी जेब से पैसे खाली होते है। ये सोमपुरा फेमिली मंदिर नहीं बनायेंगे तो दूसरा काम ढूंढ लेंगे, भूखे नहीं रहेंगे। उनकी कारीगरी मंदिरो के बजाय सोसायटी या एपार्टमेन्ट बनानेमें उपयोग करेंगें। मजदूरोंको काम मिलता रहेगा।<br />
कुंभके मेलेमें गंगा नदीमें स्नान करते वक्त लाखों साधुओंकी फोटो खुशी खुशी छापते है। और शिवरात्रीके वक्त गांजा पीते साधुओंके फोटो भी अखबारवाले छापते है सौर पुण्य कमातेहै। लोग भी खुश होते है, कैसा महान देश है हमारा। दोचार बुद्धु गोरे आ जाये तो लोग ज्यादा खुश हो जाते है, कैसी महान संस्कृति!!! साक्षर लोग  फटाफट लिखते है की एसी महान साधु संस्था है हमारी की गोरे भी मानते है। एक साक्षरने तो लीख दिया की पश्चिमके लोग अपनी संजीवनी विद्यामें विश्वास रखते है। कोमामें चले जाते है वो वापस होशमें आते है पर मरा हुआ जिवित हो सकते है? कोमामें गया  होशमें आता होगा और मानते होगेंकी संजीवनीके प्रयोगसे जिन्दा हुए।<br />
            </div>
<div>              समजनेकी बात है जहां चोरी ज्यादा होती है वहां पुलिसकी जरुरत ज्यादा रहेती है। एसा जहां अधर्म ज्यादा वहां धर्मकी और साधुओं,गुरुओंकी जरूरत ज्यादा।  चोर अपना धंधा चालु रखनेके लिए पुलिसको भ्रष्टाचारी बनाते है,एसेही अधर्म चालु रखनेके लिए साधु, गुरुको भ्रष्टाचारी बनाना पडता है या बनना पडता है। चोर ही पुलिस बन जाए तो किसीको पकडनेकी चिंता ही नहीं।  अधर्मी और कामचोर साधु,गुरु बन जाए तो  सच्चे गुरु खो जाते है। अभिनयके निष्णात गुरु सच्चे गुरु होनेकी एक्टींग करेंगे, प्रवचन देगें, ह्रदयद्रावक कथाए कहेंगे और भोली जनताके करोडो रूपिया आश्रमो बनानेमें लगायेंगे| बादमें उनके लिए झगडे होंगें, खून भी हो जाते है। ये साधुसंस्था देशके लिए नुकशानकारक है। गुरुगुलामी मानस  प्रजाके लिए ज्यादा नुकशानकारक है।*</div>
<br />Filed under: <a href='http://brsinhji11.wordpress.com/category/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/'>विवाद</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/brsinhji11.wordpress.com/63/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/brsinhji11.wordpress.com/63/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/brsinhji11.wordpress.com/63/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/brsinhji11.wordpress.com/63/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/brsinhji11.wordpress.com/63/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/brsinhji11.wordpress.com/63/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/brsinhji11.wordpress.com/63/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/brsinhji11.wordpress.com/63/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/brsinhji11.wordpress.com/63/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/brsinhji11.wordpress.com/63/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/brsinhji11.wordpress.com/63/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/brsinhji11.wordpress.com/63/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/brsinhji11.wordpress.com/63/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/brsinhji11.wordpress.com/63/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=63&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>ब्रह्मचारी किसे कहेते है?</title>
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		<pubDate>Sun, 20 Jun 2010 01:16:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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		<description><![CDATA[ ब्रह्माध्ययन संयुक्तो ब्रह्मचर्यरतः सदा॥ सर्व ब्रह्मेति यो वेद ब्रह्मचारी स उच्यते॥५१ श्लोकार्थः ब्रह्माध्ययन से युक्त, सर्वदा ब्रह्मचर्यमें प्रीति रखनेवालेके लिए सर्व ब्रह्म है,एसा जो जानता है वो ही ब्रह्मचारी कहेलाता है।                               आध्य जगदगुरु शंकराचार्य एक महा ब्राह्मिन थे&#124;उन्होने हिंदु धर्ममेंसे बदीओंको हटानेके लिए खूब महेनत की थी। छोटी उमरमें ही देवलोक  हुए थे। उस समयका [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=59&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/06/images8.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-60" title="images[8]" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/06/images8.jpg?w=92&#038;h=135" alt="" width="92" height="135" /></a> ब्रह्माध्ययन संयुक्तो ब्रह्मचर्यरतः सदा॥<br />
सर्व ब्रह्मेति यो वेद ब्रह्मचारी स उच्यते॥५१<br />
श्लोकार्थः ब्रह्माध्ययन से युक्त, सर्वदा ब्रह्मचर्यमें प्रीति रखनेवालेके लिए सर्व ब्रह्म है,एसा जो जानता है वो ही ब्रह्मचारी कहेलाता है।                   <br />
    </div>
<div>      आध्य जगदगुरु शंकराचार्य एक महा ब्राह्मिन थे|उन्होने हिंदु धर्ममेंसे बदीओंको हटानेके लिए खूब महेनत की थी। छोटी उमरमें ही देवलोक  हुए थे। उस समयका भारत मतलब जगत। भारतके, जगतके सभी पंडितोको हराया था। एक मात्र महा पंडित मंडन मिश्र बचे थे उनको भी हराया, पर उनकी धर्मपत्नी महा विदूषी ने प्रश्न उठाया की में उनकी अर्धांगीनी हुं तो मुझे हराओं तो ही हार मानी जाय | ओर बालब्रह्मचारीको कामशास्त्रके विषयमें प्रश्न पूछे| बालब्रह्मचारीने थोडा समय मांगा ओर उसमें ज्ञाता बनके पंडित पत्नीको भी हराके जगदगुरु कहेलाए| किस तरह ज्ञाता बने वो एक रहस्यमय कहानी है।     <br />
   कुछ टीकाकार ब्रह्म अध्ययनकी जगह वेद अध्ययन कहेते है। शायद वेद ही ब्रह्म अध्ययन हो एसा मानते हो। पर शंकराचार्य वेदोके ज्ञाता थे। उन्होंने वेद अध्ययन शब्द ही क्यू नहीं  कहा? दूसरा उसमे शंकराचार्यने कहीं स्त्री शब्दका उल्लेख नहीं किया है और नही कहा है की स्त्रीसंग से दूर रहो. पर शायद टीकाकार खुदकी ही मान्यताओं को थोपते हो।    <br />
   सदाचार का मतलब क्या है? अच्छा आचरण करना एसा सादा अर्थ है। किसीको तकलीफ ना दे एसा आचरण| महापुरुषोके आचरणको देखके एसा आचरण अपनाओ या  खुद ही अंदरसे जाग्रत हो के सर्व ब्रह्म है एसी अनुभूति करके ज्ञान प्राप्त हो जाए,ओर अपनेआप आचरण बदल जाये।<br />
   महापुरुषोका आचरणकी नकल एक उपाय है,दूसरा खुदकी  अंदरसे जागृतिसे सदाचरण आना। चाहे बहुत सारे साद आचरण के  श्लोकोका पठन करो फर्क नहिं पडता बल्कि एसा हो शकता है की खंडित व्यक्तित्व हो जाए। एक उदाहरण देखते है भगवान महावीर  एक चींटीको देखकर उसको बचानेके लिए कूद गये। उनहोंने ये जाना है की सर्व ब्रह्म है ओर उसका अनुभव भी किया| इसलिए वो किसीको भी दुःख नहीं दे शकते। अब जैन क्या करेंगे? चींटीको देखके कूद जाएगें,चींटींके दरमें आटा डालेंगे पर व्यवसायमें किसीकी जेब काटनेमें उन्हें ब्रह्म नहीं दिखेगा या जीव नहीं दिखेगा। ये अकेले जैनोकी बात नहीं है हरेककी है। बहुत सारा दान देना, पशुओंके लिए पांजरापोल खोलेगें ओर दूसरी ओंर बेंकोसे करोडो गरीबोंके पैसे ऐंठ लेनेमें उनका जी नहिं हिचकिचायेगा।<br />
    *दूसरी एक नकलकी बात भगवान महावीर १२ साल तप ओर साधनामें रहे तब एक चींटीमें भी ब्रह्मकी अनुभूति हूइ थी। इन १२ सालमें भोजनके कुल दिन गिने तो एक साल ही भोजन लिया था।मानो की   उन्होंने तय किया की मै भिक्षा तब लूंगा जब कोई  लाल कपडे पहेने हुइ स्त्री हो, जिनके हाथमें नन्हा बालक हो, पासमें सफेद रंगकी गाय हो तो हि भिक्षा लूंगा नहीं तो वापस आ जाऊगा। एसी परिस्थिति कब हो? जब तक एसी परिस्थिति ना हो तब तक उपवास किये। एसी शक्यताए १२ सालमें एक सालके दिन जैसी ही हुइ थी मतलब की ३६५ दिन ही भोजन प्राप्त हुआ। अब आजके महाराज क्या करेंगे? एसा नियम तो ले लेंगे ओर भक्तोंको पहेले से एसी शक्यताओंकी व्यवस्था करने के लिए बोल देगें। सब कुछ तैयार ओर महाराजसाहेब आके ये देखके भिक्षा लेके अपनी प्रतिज्ञा पूरी करेंगें। ये तो दंभ हुआ ना? ये आचरणकी नकल हुई इसका क्या अर्थ हुआ? <br />
 <br />
         *महावीरनी अहिंसा अंदरकी जागृतिके कारण थी जैनोकी नहीं होती॥ भगवान बुद्धकी करूणा अंदरकी जागृतिके कारन थी। अपनी नहीं हो शकती॥ महापुरुष कहेते है की क्रोध नहीं करना चाहिए। अगर हम क्रोध  करना बंद करते है तो क्या होगा? क्रोध अंदर इकठा होगा॥ छोटी छोटी बातों की निराशा क्रोधके स्वरूपमें इकठी होगी। छोटी छोटी अवहेलना क्रोध बन जाएगी बहार से शांत ओर अंदर से जवालामुखीके रूपमें एनर्जी जमा होती रहेगी। ओर एक दिन छोटे से बहाने मिलने पर जवालामुखी फटेगा। मेरा एक मित्र है हमेशा शांत, सदा हंसते रहेते है, सबको हेल्प करते रहेते है, बहार से बहुत अच्छे लगते है. पर हररोज जोबमें ब्रेक में रातको २ बजे चूपके से छुपाया हुआ शराबका पेग मारते है, ओर बादमें अंदर भरा हुआ क्रोध बहार निकलता है। सबके साथ झगडते है ओर उग्र बन जाते है। बादमें ओफीसमें जाके सो जाते है फिर चार बजे जागते है तब फिरसे सरल ओर शांत हो जाते है।<br />
     चलो हम दुर्गुणोसे बचनेके लिए जंगलमें चले जाते है पर वहां भी क्रोधित होने का कोइ चान्स नहिं है। और वापस भीडमें आते है तब अचानक किसीका  पैर पांवपे  पड गया तो गुस्सा आ जाए तो वर्षोकी साधना नाकमयाब रहेगी। एक गुरु ओर उसका शिष्य जा रहे थे रास्तेमें नदी आइ| वहां एक स्त्री नदी पार करने के लिए खडी थी उसे तैरना नहीं आता था। इसलिए वो राह देख रही की कोइ उसे नदी पार करवाऍ। गुरु तो ब्रह्मचारी थे स्त्रीके सामने देख नहीं शकते तो छू कैसे शकते? गुरुने मना कर दिया, पर शिष्यको दया आ गइ उसने  उस स्त्रीका हाथ पकडके नदी पार करने लगा पर पानी ज्यादा गहेरा था इसलिए शिष्यने उस स्त्रीको कंधे पे उठा लिया। ओर नदी पार करवाइ।गुरु शिष्य फिर आगे चले। पर गुरुको चैन नही आया| गुरुको लगाकी शिष्यने गलत किया, स्त्रीका हाथ पकडा और उठाया भी, महापाप हो गया। ब्रह्मचर्यका भंग हुआ। आश्र्म पहुंचने तक शिष्यको डांटा की तुम्हें उसे कंधे पे उठाने की जरूरत नही थी शिष्यने उत्तर दिया की हे! गुरुजी मेंने तो  उस स्त्रीको नदी पार करने के बाद तुरंत उतार दिया पर आप तो अभी तक उठाके घूम  रहे हो। इसे कहेते है बाहरी आचरण।<br />
             हम भारतीय सदाचारके श्लोकोमें ही खोये रहेते है। हमेंशा ब्रह्मचर्यकी बातें करते है, स्त्रीओके दुश्मनकी तरह बर्ताव करते है। क्या स्त्रीओमें ब्रह्म नहीं है? कुछ संप्रदाय वाले स्त्री के मुख तक नहीं देखते|सेक्स को गाली देते ही जाते है|  और सेक्स अंदर ही सप्रेस्ड होता है। थोडा सा चान्स मिला और सेक्स बाहर। बसमें या कहीं भी स्त्री पासमें बैठी तो परेशान करना चालु। मात्र स्पर्श तो ठीक स्त्रीका वस्त्र भी शरीरको छूये तो भी विहवळ हो जाते भारतयोकी सदाचारकी बातें सुनके हंसी आती है| ब्रह्मचर्यका कठिन पालन करेंगे और बादमें कीसी स्त्रीभक्तके प्रेममें फंस जायेंगे। जैसे नित्यानंद फंस गये। किसीने बिपशा बसुके स्तन पर भीडका फायदा उठाके हाथ फेर लिया। एसे है ब्रह्मचर्यके  फायदे।     </div>
<div>    उपरके श्लोकमें शंकराचर्यने कहीं पर भी स्त्रीका उल्लेख नहिं किया| ब्रह्म मे विहरना मतलब ब्रह्मचर्य| सदाय ब्रह्ममें रत रहेनेवाला, मग्न  रहेनावाला, सर्व ब्रह्म है एसा जाननेवाला ब्रह्मचारी माना जाता है। क्या स्त्रीमें ब्रह्म नहीं है? एक नन्हीं बच्चीमें ब्रह्म है एसा मान नहीं सकते? क्युं बेचेन हो जाते है? क्युं की अंदरसे सर्व जीवमें या निर्जीवमें शंकराचार्यकी तरह ब्रह्म नहीं दिखता। जो लोग सेक्स को दबाते है वे  लोगों ही ननहीं बच्ची पर रेप करते है। बच्चीमें बच्ची नहीं पुख्ता  स्त्री दिखाइ देती है इस  लिए बलात्कार कर सकते है । और बादमें मार भी  देते है। जो साधु स्त्री का मुहं तक नहीं देखते नन्ही एक साल की बच्ची तक का मुंह नहीं देखते,वो  नन्हीं बच्चीमें बड़ी  स्त्री को देखते है,उनके सामने अपनी बच्ची को मत ले जाओ। दूर रखो नन्हीं फूल जैसी बच्चीओंको। नन्हीं बच्चीओं पर बलात्कार करनेवाले  क्रिमिनल्स और ऐसे साधुओंमें तात्त्विक रूपसे या मानसिक रूपसे कोइ फर्क नहीं है। चाहे वो लोग अपने पंथके हितमें बलात्कार ना करे फिरभी उनकी बूरी नजरोंसे भी बचाना चाहिए।<br />
      १६०००रानीआं पटरानीआं, महारानीआं  और प्रेमिकाए रखनेवाले श्री कृष्णको मुक्त महापुरुषोने ब्रह्मचारी कहा है। क्या ये सब अज्ञानी थे? आजके साधु या बाबा कहेत है वो सच की मुक्त महापुरुषोने कहा है वो सत्य? कि शंकराचारय कहेत ये वो सही?      <br />
    पहेले अंदरसे जगृत बनना चाहिए। सर्व चीजवस्तु मात्र, जीवमात्रमें ब्रह्म है ये जानना चाहिए। किसी सदाचारकी नकल नही करनी पडेगी। अंदरसे ही सदाचार आ जायेगा। फिर  आप किसीकी जेब काट ही नही सकते। किसी चींटीको मार नहीं सकोगें या उसे देखके कूदना नही पडेगा अपनेआप हो जाएगा। किसी टेक्सकी चोरी नहीं कर पाओगें, भाव ज्यादा नहीं ले पाओगें, कमतोलमाप में चीज नहीं देगें, किसी पर बलात्कार नहीं कर पाओगें, किसीकी उपस्थिति आपको विचलित नहीं कर सकेंगी। सर्वमें ब्रह्म देखेंगे तो किसीको दुःख नहीं दे सकोगें। शंकराचार्यने सभी श्लोक ब्रह्म को जाननेके बाद लिखे है।              <br />
     तो फिर क्या करना चाहिए? सदाचारका आचरण नहीं करना चाहिए? जरूर करना चाहिए। किसीको अचानक तकलीफ क्यूं देनी चाहिए? पर साथ में ध्यान भी करना पडता है। ध्यान ही एक मात्र उपाय है। किसी सदाचारकी नकलसे ब्रह्म नही जान सकतें। अंदरकी जागृतिके लिए ध्यान करो कोइ व्रत या जप तप की आवश्यकता नही है। ध्यानसे ही धीरे धीरे अंदरसे शांत होते जायेगें और बाहर सदाचार आता रहेगा और बढता जाएगा। पता भी नहीं चलेगा।  जे. कृष्णमूर्ति उसे चोइसलेस अवेरनेस कहेते थे । एक साक्षीभाव जागता है, अनासक्त योग पेदा होगा अंदरसे शांत होने से काम(सेक्स)के प्रति रसकम होगा। क्रोध कम हो जायेगा। सबमें ब्रह्म है एसी प्रतितीसे प्रेम और करूणा बढेगी॥ तो बाबा साधु लोगोंने गलत मतलब निकाल दिया की कामसेक्स से दूर रहेना चाहिए। पर ये बाबा साधु तो काम(वर्क)से भी दूर रहेने लगे। गांधीजीने काम-सेक्सको जितनेके प्रयास बहुत सारे किये पर ध्यानको महत्व नहीं दिया और बुढा काम को बिना जीते चले गए। बाह्य सदाचरणसे पाखंडी बन जाते है अगर साथमें ध्यान नहीं किया तो|</div>
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		<title>What is Love?(प्रेम पुराण),,,,,,,,,प्रेरणामूर्ति मीरां.</title>
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		<pubDate>Wed, 02 Jun 2010 01:28:02 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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		<description><![CDATA[       What is Love?                  मेरे एक परम मित्रने सवाल किया की प्रेम क्या है?लव के बारे में कुछ लिखो&#124; मेरे जैसे उग्र लिखने वालेको एसा सवाल? पर क्या करे फरमाइश पूरी करनी ही पडेगी। शायद उनका मक्सद होंगा की  थोडे समयके लिए उग्रतासे कोमलता तरफ जाउं। ब्लोगाचार्य कहते है की ललितभाव जागने चाहिए। प्रेम शब्दकी बात आती है तो पहले  ख्याल मुझे मीरां [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=56&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/06/images10.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-57" title="images[10]" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/06/images10.jpg?w=73&#038;h=107" alt="" width="73" height="107" /></a>       What is Love?        </p>
<p>         मेरे एक परम मित्रने सवाल किया की प्रेम क्या है?लव के बारे में कुछ लिखो| मेरे जैसे उग्र लिखने वालेको एसा सवाल? पर क्या करे फरमाइश पूरी करनी ही पडेगी। शायद उनका मक्सद होंगा की  थोडे समयके लिए उग्रतासे कोमलता तरफ जाउं। ब्लोगाचार्य कहते है की ललितभाव जागने चाहिए। प्रेम शब्दकी बात आती है तो पहले  ख्याल मुझे मीरां का ही आता  है। मेवाड की  मीरांबाई(ई.स. १४९८-१५४७). मीरां राजकुंवरी थी। मेडताके राजा रतनसिंह राठोड्की बेटी थी। जोधपुर शहेरको बसानेवालेके वारिश  थे। मीरांकी शादी चितोडके महाराणा सांगा के बेटे भोज के  साथ हुइ थी। ये महाराणा सांगाने बाबर के साथ युद्ध किया था। सबसे बडे बेटे कुंवर भोज उस युद्धमें मारे गये। पर मीरां मनसे कृष्णको अपना पति मानती थी उस लिए वो विधवा नहिं हुई। लोहीकी सगाईमें मीरां जगविख्यात महारणा प्रतापकी बडी काक़ीमा थी। कुंवर भोज महाराणा प्रतापके पिता उदयसिंहके बडे बाई लगते थे। ये उदयसिंहके कारण सबसे ज्यादा सुंदर शहर उदयपुर मिला। विदेशी सहेलानीयाओंका एक सर्वे हुआ था उसमें भारतका सबसे श्रेष्ठ शहर धूमने के लिए उदयपुर पहेले नंबर पे है।<br />
प्रेमदीवानी मीरां, दर्ददीवानी मीरां ईतिहासकी एक अमर छवि  है। मीरां जब छोटी लडकी थी तब कीसी महेमान साधुके पास एक श्री कृष्णकी मूर्ति थी. बालमीरांको वो मूर्ति पसंद आ गई। मीरांने साधुसे वो मूर्ति मांगी पर साधुने देनेसे इन्कार किया और चल दिया। पर साधुके अचेतन मनमें मीरांका मूर्तिके प्रति जो प्रेम अंकित हो गया होगा। इसलिए साधुके अचेतन मनको चेन नहीं हुआ उसे सपने आने लगे और साधुने वापस आके मीरांको वो मूर्ति दे दी। और तबसे मीरां कृष्णकी दीवानी हो गई। कृष्णकी भक्तिमें मग्न हो गई। मीरांबाईने जिंदगीके आखिर के दिन द्वारिका(गुजरात) में बिताएं।<br />
 <br />
        *मूर्ति तो एक बहाना था। प्रेम तो मीरांके अंदर कूट कूटके भरा था। मूर्तिके बहाने बाहर आया। मीरां प्रेममय बन गई। मूर्ति कृष्णकी थी वो कृष्ण तो ५००० साल पहेले हुए थे। मीरांने कहां कृष्णको देखा था? राधाने तो कृष्णको देखा था। फिरभी कृष्णने एकबार गोकुल छोडा बादमें कभी वापस गोकुल नहिं गये थे। अगर प्रेम आपके अंदर है तो कृष्ण तो एक माध्यम है। आधुनिक युगमें क्या मीरां हो शकती है। अगर कीसीको मालूम हो तो बताएं।</p>
<p>           *सती किसको कहेते है। सामान्य पुरुषके प्रति असीम प्रेम हो और उसके बिना जीना दुस्वार हो जाए। कोमन  पुरुष तो बहाना है। सतीके अंदर ही प्रेम कूट कूटके भरा होता  है। जला देने से कोई सती ना बन जाए। धार्मिक या सामाजिक दंभीओंने लाखों स्त्रीओंको भारतमें एसे ही जला दी है। हुण लोग बहारसे आये और सती होने की परंपरा ले आये| ये एक बडी दिमग अंग्रेजोके कारण नष्ट हुई। थेंक्स टु ब्रिटिशर।<br />
      *प्रेम हजारों लाखों फूलों की सुगंघ है| फूल ये नहीं कहेता  की मै मेरी महेक कीसी एक  को हीं दूंगां। फूल ये नहीं कहेता की मेरी महेंक सिर्फ उसके लिए है और इसके लिए नहीं है। सिर्फ एक शर्तमें प्यार हो गया व्यापार| प्रेम मुक्ति है। बंधनमें बंध जाए तो मोह बन जाए। गुजराती लेखिका वर्षा पाठकने लिखा है &#8216;मुझे बेटेको श्रवण नहीं बनाना है। बेटे को श्रवण बनाके रखनेवाली माता मोहवश है, प्रेमवश नहीं है| कभी बेटेको &#8216;राम&#8217; भी मत बनाओं। राम बनानेवाले पिता अहंकारग्रस्त है। पिताको आज्ञापालक संतान अच्छी लगती है। पिता भगवान नहीं है। वो भी अयोग्य मांग रख सकते है। बच्चो के  प्रति मोह कब तक रखोगें? ये शिखना है तो प्राणीओं से शीखे। में शीखा हुं एक चित्तेके जिवन कवनको टीवी पर देखकर। संतानोको मोहसे मुक्त रखकर सारी जिंदगी प्यार करने से कौन रोकता है? जन्म देकर उनके मालिक बननेका कौन कहेता है? प्रेम मे मालिकी भावही प्यारका सत्यानाश करता है। पुत्रकी शादी होते ही माताको लगता है की २५ साल तक मेरा था अब कीसी ओर का हो गया। साडीका पल्लु पकडनेवाला अचानक अब दुपटेके पीछे घूमेगा। फिर दोनों और का मालिकीभाव शुरु। बेटेकी अंगत जरूरतको माता पूरी कर सकती है क्या ? प्रेम मुक्त करता है और मोह बंधन देता है। मोह शुध्ध  बने तो  प्रेम और प्रेमकी अशुद्धि मोह। प्रेम जीनेकी ताकत देता है, मोह जीना दुस्वार कर देता है।<br />
   </p>
<p>      * प्रेम कीसीको दुःख देने के प्रयास नही करता पर मोह और मालिकीभाव कर सकता है । जब कोइ साक्षर या चिंतक रामायणको प्रेमका महाकाव्य कहेते है तब मुझे गुस्सा आता है, हंसी भी आती है । लक्ष्मण बन्धुप्रेममें मग्न था । पर लक्ष्मणको तो ठीक राम जैसे महापुरुषको भी उर्मिलाका ख्याल क्यूं नहीं आया?  सबसे ज्यादा महान प्रेम तो उर्मिला का हुआ । प्रेममें बेटेको वनवास कैसे दे सकते है? हम बेटेको उनकी मनपसंद केरीयरमें पढने ना देकर  और उसके स्वप्नोको ना पूरा करके चौदाह सालकी जगह पूरी जिंदगीका वनवास देते है । प्रेममें अग्निपरीक्षा? प्रेम और त्याग प्रिय पत्नी  का? प्रेमका महाकाव्य? हा!!हां!हां!ह!!!! कौन ज्यादा  बलिदान देता है और सदीओं तक बने रहे ,ऐसे बलिदान लेने देनेकी जैसे स्पर्धा लगी है । ऋषि पत्नी अरुंधतीने प्रण लिया था की रामके द्वारा  त्यागी हुई सीताके बिनाकी अयोध्यामें  कभी पांव नहीं रखुंगी। प्रेम परोक्ष रुपसे किसीको दुःख नहीं देता। ईसलिए कहेता हुं की अहिंसा सिर्फ भगवान महावीरकी। करुणा सिर्फ भगवान बुद्धकी और प्रेम सिर्फ मीरांका । <br />
 <br />
        *सहानुभूति, सिम्पथी प्यार नहीं है । वो तो एक सामाजिक व्यवहार है। सहानुभूतिको अगर प्रेम माना तो दुःखी होंगे। फिर बारबार सहनुभूतिकी जरुर रहेगी। बीमारको सहनुभूति ज्यादा मिलती है और अच्छि भी लगती है। सगे संबंधी, पतिदेव, बेटे-बहु सब आसपास जमा होंगे। फिर ये दुष्चक्र चलता रहेगा। जैसे किसीने नोटीस करना बंद किया, तो हो गए बीमार| फिरसे सब जमा। हररोज सब लोग हाल पूछने लगेगें। अच्छा लगने लगेगा। बीमारीमें रस लेने लगे तो गये कामसे। जरासा किसीने ध्यान नहीं दीया हो गये बीमार। प्रेम जीनेकी ताकत है और सहानुभूति बीमार रहेना शीखाता है। ये एक मनोविज्ञान है। भारतमें मनोविज्ञान नहीं शिखाते| अमेरिकामें कोलेजमें किसी भी कोर्समें कुछ सायकोलोजी कम्पलसरी पढनी पडती है।<br />
     </p>
<p>        * ध्यान, नोटिस ये सब मनकी  खुराक है। घरमें महेमान आते है तो बच्चोंको नोटिस नहीं करेगें तो बच्चे मस्ती करेगें या जोरसे बिना कारन रोने लगेगें या खाना मांगेगें। पूरा दिन औरते पासपडोशमें गप्पें लगायेगी, टीवी पर सांसबहूके झगडेवाली सिरियल देखेंगी या माताश्रीके या सहेलीओंके साथ फोनमें बातें करेंगी और जैसे ही पतिदेवके आनेका समय हुआ की सिर पकडके विक्स लगाके सो जाएगी। पतिकी सहानुभूति चाहिए। पति चिंतित हो जाए तो मजा आ जाए। थोडे आगेपीछे घूमे  तो अच्छा लगता है। सिरदर्द गायब। जेन्युइन बीमारी के सिवा ज्यादातर बीमारी सायकोसोमेटिक-मनोशारिरीक होती है।  परीक्षाके वक्त ही बच्चोंको शरदी जुकाम हो जाती है, बुखार आता है॥ ये सब अचेतन मनकी करामत है। चाइल्ड सायकोलोजी सभी माबाप को पढनी ही चाहिए।   अमेरिकामें तो pet सायकोलोजी मतलब पालतू जानवरकी सायकूलोजी भी पढाते है । सहानुभूतिको  प्रेम मानते हो और बारबार बीमार हो जाते हो तो जरा सोचना सहानुभूति पानेकी आदत तो नहीं हो गइ ना? बारबार बीमार रहेते हो और डोक्टर अशक्त  होने की बात करे और कुछ निदान ना करे और शक्तिकी या एन्जाइम या पाचनकी दवायें दे या केलशियम-आयर्न की गोलीयां दे तो समज जा ना की सहानुभूति पानेकी आदत बन गइ है। हररोज विक्स लगानेकी जरुर लगे तो समजना सहनुभूतिकी आदत हो गइ है।<br />
     <br />
                सहानुभूति को प्रेम समजनेकी भूल मत करो| मेरे पिताश्रीको हार्ट एटेक आया था। गांधीनगर (गुजरात) की सिविल होस्पिटलमें दाखिल किया था। पूरा गांव खबर पूछने आया था । बहुत भीड हो गइ थी॥ तब डोक्टरने मुझे एक बात कही थी। ये सब सिर्फ अपनी हाजरी देने आये है। कई लोगोंको हाजरीपत्रक भरवानेकी मजा आती है। कोइ अगर किसी कारनवश ना आ सका तो वो ध्यानमें लिया जाता है। एक आप ही नहीं आये थे एसा कहेके गिल्टी फिल कराते है। अगर इसकी आपको  आदत पड गइ तो समझ लो आप हाजरीपत्रक भरने के लिए बीमार पडते है। कइ लोगोको आदत होती है हररोज रातको या सुबहको पत्नीके पास पैर दबवानेकी या बदन मसलवानेकी। उसकी खास आवश्यकता नहीं होती है पर सेवाकी आदत हो जाती है। हररोज पैर दुःखे तो डोक्टरसे सलाह लेनी चाहिए।<br />
    <br />
                  प्रेम मुक्तिका मार्ग है। मोह बंधन का और सिम्पथी  बीमारीका| दो आत्माके बीचका मिलन प्रेम है। दो शरीरके बीचका मिलन काम(सेक्स) है। दो आत्माओंके साथ दो शरीरका मिलन समाधि है। शायद वो समाधि क्षणिक हो पर व समाधि ही है। बारबार समाधिमें उतरके नित्य युवा रहेने के भरपूर होर्मोन्स पा सकते  है। बहुत सारे रोगो दूर हो जाते है। मन प्रफुल्लित रहेता है, स्ट्रेस कम होता है। स्त्रीओमें इस्ट्रोजन लेवल बढनेसे स्त्रीत्वमें वृद्धि होती है और पुरुषोमें टेस्टाटोरिन  लेवल बढने से पुरुषत्वमें वृद्धि होती है। इसलिए समाधिमें उतरने की बातमें कंजूसी नहीं करनी चाहिए| इसी सायन्सको नहीं समजनेवाले साधू बाबा  गुरुओकी बातें माननी नहीं चाहिए।<br />
 <br />
                        ये प्रेम पुराण कथा भगवान विष्णूजीनेस्वयं हमें बताई थी| फिर हमने मुनि  श्री फ्रोइडको सुनाइ। मुनि फ्रोइडने हमारी आज्ञासे मुनिश्री एडलर, कार्ल जुंग(युंग), डो. मृगेश वैश्णव(अहेमदाबादके) को सुनाइ । या तो सभी मुनिश्रीओ द्वारा हमने सुनी हो ऐसा भी हो सकता  है। क्योंकी हम  अहं ब्रह्मास्मि में मानते है। ये सब मनोवैज्ञानिक मुनिश्रीओ ब्रह्म है| हम भी ब्रह्म है। आप सर्वे वाचकगन  बी ब्रह्म है। शायद विस्मृतिके कारन भूल गये हो इसलिए   फिरसे कहेनी पडी। इतिश्री राओल रचित प्रेमपुराणका प्रथम अध्याय समाप्त| ये प्रेमपुराणका नित्य पाठ करने से घरमें आधि,व्याधि,उपधि नष्ट होती है। घरमें बीमारी नहीं आती। बच्चे स्वस्थ रहेते है। इसलिए पैसे व्यय नहीं होते। लोगोंको घरमें ही समाधिका अनुभव होता है। और गुरुओके पास जान नही पडता। बाबा  गुरु भूखों मरेगें पर देशको तो लाभ होंगा|</p>
<br />Filed under: <a href='http://brsinhji11.wordpress.com/category/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/'>विवाद</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/brsinhji11.wordpress.com/56/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/brsinhji11.wordpress.com/56/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/brsinhji11.wordpress.com/56/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/brsinhji11.wordpress.com/56/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/brsinhji11.wordpress.com/56/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/brsinhji11.wordpress.com/56/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/brsinhji11.wordpress.com/56/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/brsinhji11.wordpress.com/56/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/brsinhji11.wordpress.com/56/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/brsinhji11.wordpress.com/56/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/brsinhji11.wordpress.com/56/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/brsinhji11.wordpress.com/56/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/brsinhji11.wordpress.com/56/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/brsinhji11.wordpress.com/56/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=56&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>पावागढ(गुजरात) के राजा पताई और माताजी का पल्लू&#124;</title>
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		<pubDate>Fri, 28 May 2010 21:46:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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			<content:encoded><![CDATA[<p>  <a id="apf7" href="http://www.google.com/imgres?imgurl=http://2.bp.blogspot.com/_FHRezS520fk/Sur_HuHjKRI/AAAAAAAAAKM/NKrdKr5cScE/s320/Mahakali%252BMaa.jpg&amp;imgrefurl=http://anjouan_feuille_de_route.images9.com/comores_carte.html&amp;usg=__KgX2ssNQA-cPkrqn07rSHHbqKBY=&amp;h=320&amp;w=273&amp;sz=33&amp;hl=en&amp;start=8&amp;sig2=8yO_9SrHOiLhIEwg9CXvOg&amp;itbs=1&amp;tbnid=-25-5NI7h3LRwM:&amp;tbnh=118&amp;tbnw=101&amp;prev=/images%3Fq%3Dmahakali%2Bmaa%26hl%3Den%26gbv%3D2%26tbs%3Disch:1&amp;ei=5zgATPvqMIWclgftvfTyCQ"></a>          पावागढके राजा पताई के बारेमें लोगोंमें गलतफ्हेमी आज भी है. पताई राजा पृथ्वीराज चौहाण क वंशज पावगढका लोकप्रिय राज था। मातजीका परम भक्त था और महाकाली मां के दर्शन के बिना पानी भी नहीं पीता था। अब समजने की आत ये है की जब महमद बेगडाने पावागढके किल्ले को जितनेके कडे प्रयास किये, फिर भी पावागढके अजेय किल्ले को जितने में बारबार नाकाम्याब रहा। पावागढका भौगिलिक स्थान ही कुछ ऐसा था। किल्लेमें प्रवेश करनेके गुप्त मार्ग मिलने पर ही सफल होना मुमकिन था । और राजा अगर प्रजा को प्रिय हो तो कोइ गद्दार मिलना मुश्किल होता है।</p>
<p>          अब समजने की बात ये है की मातजी कोइ व्यक्ति नहीं है. शक्ति और स्त्रीत्वका एक प्रतिक मात्र है। उनकी पूजा करना मतलब उनका बहुमान आभार व्यक्त करनेकी रीत है. एनर्जीका सही उपयोग ही माताजीकी भक्ति है। अब महमद बेगडेने राज रमत करके शीघ्र कविओंके पास कविताएं बनवाई और गरबा की रचना करवाके माताजी को गरबा खेलने आये और पताई राजाने माताजीका पल्लु हाथमें लिया। अब जो लोग माताजीके परम भक्त है और माताजीके दर्शन किये बिना पानी तक ना पीए व क्या ऐसा कर शकता है भला? और पहेले तो माताजी कोइ व्यक्ति बनके गरबा खेलने आ शकते है? माताजीने श्राप दिया ऐसा अंधविश्वास कविओं और वार्ताकारोंने फेलाया और पताई राजाको चारित्र्यहीन साबित कर दिया.लोग पताई राजाके विरोधी हो गये और मानने लगे की राजाका पतन होना चाहिये । इस्लिए गुप्त रास्ते महमद बेगडेको बता दिये और पावागढका पतन हुआ और उनके वंशज भाग गये और आसपासमें छुप गए बादमें जब मौका मिला तो फिरसे अपने राज्यकी स्थापना की। देव्गढबारियाकी स्थापना पताई राजाके वंशजोने की थी।. वहांके महाराजा जयदीपसिंह लोकसभाके उम्मीदवार थे। स्पोर्ट अथोरिटीके चेरमेन थे, जयपुरकी राजकुंवरी के साथ उनकी शादी हुई थी।<br />
 </p>
<p>            ऐसी ही एक और गेरमान्यता है की जब महमद गजनी ने सोमनाथ पर चडाई की तब ब्राह्मिनोने कहा की शिवजी तीसरा नेत्र खोलेगें और सब भस्म हो जाएंगे। सब शिवलिंगको बचाने के लिए लिंगको लिपट लिपट कर कटके मर गये पर किसीने तलवार नहीं उठाई. पथ्थरको भगवान मानना बूरा नहिं है। पर पथ्थरका लिंग जो मेल जेनेटल अंग और जलाधारी पार्वतीकी योनिका प्रतीक है, सर्जन का प्रतीक मात्र है। उसके पास सबक भस्म करनेकी आशा रखना मुर्खामी है। और एसी अंधश्र्द्धा फेलाने वाले और माननेवाले भी गुनेगार है।</p>
<p>                  लोगोंको जैसे बिना अंधश्रद्धाके चलता ही नहीं ऐसा लगता है। जिने के लिए जैसे कोइ सहारा है किसीके सहारे के बिना जी ही नहीं सकते मर जाएगें । और कभी संतोषी मता तो, कभी दशामा एसे हरबार कोइ कोइ चलता रहेता है। व्रतकथा ना की तो जहाज डूब जाएगें दरियामें और कथा करो तो डूबे जहाज वापस आयेंगें। टायटेनिक डूबा तो वापस क्यों नही आया।<br />
  </p>
<p>                         *सर्वाइवलके युद्धमें जो कमजोर हुआ वो मर गया समजो। कोइ भगवान बचाने के लिए नहीं आयेगा क्यंकी भगवानने ही एसा नियम बनाया है। और भगवानके लिए पृथ्वी पर रहनेवाले सभी जीव एकसमान है। भारतीय ज्यादा प्रिय और दूसरे नहिं एसा नहीं है। इन्सान ज्यादा प्रिय और प्राणी नहीं एसा नहीं है।* कुदरतके लिए सभी एकसमान है। ऐसा ही होता तो गजनी जीतता नहीं. मुस्लिमोने हजर साल राज नहीं किया होता और २०० साल अंग्रेजोने राज नहीं किया होता अगर हम धार्मिक लोग ही ईश्वरको ज्यादा प्यारे</p>
<br />Filed under: <a href='http://brsinhji11.wordpress.com/category/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/'>विवाद</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/brsinhji11.wordpress.com/54/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/brsinhji11.wordpress.com/54/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/brsinhji11.wordpress.com/54/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/brsinhji11.wordpress.com/54/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/brsinhji11.wordpress.com/54/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/brsinhji11.wordpress.com/54/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/brsinhji11.wordpress.com/54/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/brsinhji11.wordpress.com/54/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/brsinhji11.wordpress.com/54/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/brsinhji11.wordpress.com/54/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/brsinhji11.wordpress.com/54/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/brsinhji11.wordpress.com/54/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/brsinhji11.wordpress.com/54/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/brsinhji11.wordpress.com/54/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=54&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>अमेरिकन गंदगी भारत में?</title>
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		<pubDate>Fri, 28 May 2010 01:41:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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		<description><![CDATA[         ब्लोग जगतमें कहीं पढ़ा था किसी के अभिप्राय  में की अमरीका से हररोज गंदगी भारतमें आती है &#124; शतप्रतिशत सच  बात है &#124; उसके लिए कौन जिम्मेदार ? क्या अमरीका जिम्मेदार है ? होगा मेरी ना नहीं है पर ग्लोबल  वर्ल्ड के व्यापार जगतमें कितनो को मना  करा सकते  है &#124; पेप्सी,कोला या फेंटा को निकाल देनेके बाद भी वापस [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=50&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>         ब्लोग जगतमें कहीं पढ़ा था किसी के अभिप्राय  में की अमरीका से हररोज गंदगी भारतमें आती है | शतप्रतिशत सच  बात है | उसके लिए कौन जिम्मेदार ? क्या अमरीका जिम्मेदार है ? होगा मेरी ना नहीं है पर ग्लोबल  वर्ल्ड के व्यापार जगतमें कितनो को मना  करा सकते  है | पेप्सी,कोला या फेंटा को निकाल देनेके बाद भी वापस आ गई उसके लिए कोंन जिम्मेदार है हम भी उतने ही जिम्मेदार है |<br />
     </div>
<div>                बरोडामें सिर्फ मेरे घर के सामने ही कोई गंदकी डाले तो में लड  पड़ता था |  घर के आगे घरमें नहीं |अगर में उस वेस्ट को  किसी और काम में ले लेता तो ? तो हररोज लोग मेरे घरके सामने गंदकी डाल जाते | और अगर में उस कचरे के बदलेमें डालने वाले को कुछ रुपये  देता तो उन लोगों को और भी मजा आता और भी जगह से भी  कचरा लाके मुझे बेचते और पैसे  बनाते| अब उसी कचरे को सचीन और अमिताभ साहब प्रमोट करते है तो में ज्यादा से ज्यादा लूँगा और मेरे पडोसी और सचिन और बच्चन सब लोग कितने खुश होके पैसे  बनाते और मेरा क्या होता? घाटा, अब पूरी बात को समजे तो उसमे दोष किसका ज्यादा है  पडोसी का? या उसी कचरे को अच्छी चीज माँनके  स्वीकार किया और उसे प्रमोट करके अपने स्वार्थ के लिए पेसे बनाने वाले  तेंदुलकर और बच्चन साहब का दोष? बादमे में आवाज उठाऊ की  अम्रीका से हररोज गंदकी भारतमे डाली जाती है उसका क्या अर्थ? उसको लेते ही क्यों हो?</div>
<div> </div>
<div>                भारत की जनता खुदको ज्यादा बुद्धिमान समजती है तो फिर क्यों ये गंदकी को प्रमोट करनेवालों को हीरो मानती है और उंकी पूजा करती है? बच्चन साब बीमार होते है तो पूरा भारत  मानता है की उनके बिना भारत का उद्धार ही नहीं और मंदिरों में जा के पूजा, प्रार्थना करते है | किसी सैनिक या त्रासवाद के सामने लड़नेवाले वीरगति प्राप्त करनेवाले को कोई याद क्यों नहिं करता? संसद पर हुए  हुमलेमे मरने वाले की आठवी वरसी में कीसी को वक्त नहिं मिला की उन लोगोंकी आत्माकी शांति  की लिए प्रार्थना करने की और उनके परिवार जनको याद करनेकी किसीने परवाह  की ? उन लोगोकी श्रध्धानजली के अवसर पर किसी आगेवान नेताको या सचिन या बच्चन साहब  को वक्त ही नहीं मिला| सचे हीरो के लिए किसी के पास वक्त नहीं है|<br />
   </div>
<div>         पेप्सी या  कोक से  बाथरुम-टोइलेट अच्छे साफ़  होते है ट्राय करके देखना| क्यूँ? उसका पी.एच.ज्यादा है| अमरीकामें अगर में सोडा हाथमे  लेता हू तो मेरे बेटे मेरे मुझे  आँखे दीखाते है| यहां पेप्सी, कोला कोई नही कहेता सोडा कहेते है | यहां मेरा बेटा जो क्रिकेट खेलता है वो कभी भी पेप्सी या कोक नही पीता और मुझे भी नहिं पीने देता | पेप्सि के एक एक घूंट दन्त के इनेमल को नुकशान करता है| तो हमारे लीवर और पेट की क्या हालत होती होगी? अब कोई कितना भी प्रचार करे क्या खाना क्या पीना ये हमें तय करना है| कोई तो जहर भी बेचे को लड्डू हमें तय करना है की क्या खरीदना | सिर्फ एक दिन लोग समजकर पेप्सी-कोला नहीं पिएगे तो?  दुसरे ही दिन पेप्सी-कोला की कम्पनी खुद सब कूछ समेटने लगेगी   ही और एक हप्ता नहीं पिएगी तो?अपने आप कंपनी वापस चली जाएगी |   <br />
      </div>
<div>              कोई हीरो सामने से पैसे देकर कहेगा की मुझे एड में लो फिरभी ना  कहेगी और भा गा जाएगी | पर ऐसा होनेवाला तो है नहिं अपने भगवान जाहेरखबरों में से पैसे कमाते है फिर उनका क्या होगा?  हम लोग पागलों की तरह क्रिकेट, फिल्म देखते है और  जाहेरखबरोंमें से प्रेरणा लेके जंकफ़ूड और कोल्ड ड्रिंक्स खातेपिते है इसलिए तो वो लोग तो पैसे बनाते है | और इसलिए तो एड कम्पनी उनलोगों को करोडो रूपया देती है| इसलिए क्रिकेट खेल से ज्यादा फ़िक्षिंग बन गया है|  हम मेंच देखते वक्त हमारा बी.पी. बढ़ाते है एक फोर और सिकस लगायेंगे तो भारत जित जाएगा | पर उन लोगों को किसीकी परवा  नहीं होती| हम लोग अगर देखना बंद कर देंगे तो फिक्सिंग अपने आप बंद हो जाएगी.|</div>
<div>                 जंक फ़ूड को गालीया देते है पर कौन कहेता है की खाओ ? कोई हमको घरसे पुलिश की तरह पकड के नहीं ले के जाता मेक्डोनालड़में ? हम नहीं जाएगे तो वो लोग हमारी राह नहीं देखेंगे और चले जाएँगे | एक पैसेका नुकशान  नहीं सहेंगे |<br />
श्री कान्ति भट्ट  विदेशी कंपनी कारगिल और  मोंसाटो की  बात हरवक्त करते है की ये लोग भारतमें हाइब्रिड बिज और बी.टी. ब्रिंजल लाते है और कहते है की उसमे क्वोलिटी या स्वाद नहीं है | बात सही है पर में कहेता हूँ की ऐसा  कहेना चाहिए की खरीदो मत और खाओ मत एक सीजन नहीं खाएंगे तो उसके बिना मर नहीं जाएँगे | और उसका असर पड़ेगा | दुसरे सिजनमे बिज खरीदेगे नहीं तो कम्पनी अपने आप चली जाएगी| एक ही सीजन काफी है| पर ये संभव नहीं है क्योंकि सब को ये समजाये कौन ? किसी धर्मगुरु ये कहे की ब्रिंजल खाना पाप है तो ही ये संभव है | पर हो शकता है की वो कम्पनी फिर धर्म्गुरुको ही पैसे दे के चुप कर दे तो ? गुरूजी कहेंगे बैंगन  तो खाने चाहिए उससे स्वर्ग मिलता है| श्री कान्ति भट्ट का मै कुछ बातोंमें बड़ा आलोचक भी हूँ |<br />
 </div>
<div>            यहाँ में एक स्पष्टता करना चाहूँगा की तेंदुलकर और बच्चन साहब का नाम पढ़कर कोई अपना मन न दुभाये | ये तो एक एक्जाम्पल है सबके नाम तो कहाँ लिखूं ? तेंदुलकर और बच्चन साहब अपने क्षेत्रमें महान है| पर अनिल कपूर ज्यादा महान है क्योंकि उन्होंने कभी ऐसी एड करके करोडो रुपया नहीं कमाया | शायद उन्होंने कोई एड की हो ऐसा जाननेमें नहीं आया|<br />
सार ये की गंदकी उपयोग आप  करते हो इसलिए   वो लोग बेचते है लेना बंद करदेंगे तो बेचना बंद हो जायेगा | फीर अमरीका  से गंदकी आना बंद हो जाएगी |</div>
<div>                जानकारीके लिए पेप्सी कम्पनी के इन्द्रा नूयी भारतके है| उनका २००८ का कुला वेतन १,३३,८२,०३५.०० डोलर था | और आजके १ डॉलर ४६ के  हिसाबसे ६१,५५,७३.६१०.०० रूपी होता है |  ये आपके  लीवर, गुर्दा और दांत बिगाड़नेकी कीमत है|  और दुनिया के तीसरे नंबर के  पावरफुल लेडी में उनकी गिनती है | पर मुझे उसमें उनका कोई दोष नहीं दिखता दोष अपना है |और हम इस बात का गर्व महेसुस  करते है |<br />
 <br />
 </div>
<br />Filed under: <a href='http://brsinhji11.wordpress.com/category/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/'>विवाद</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/brsinhji11.wordpress.com/50/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/brsinhji11.wordpress.com/50/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/brsinhji11.wordpress.com/50/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/brsinhji11.wordpress.com/50/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/brsinhji11.wordpress.com/50/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/brsinhji11.wordpress.com/50/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/brsinhji11.wordpress.com/50/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/brsinhji11.wordpress.com/50/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/brsinhji11.wordpress.com/50/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/brsinhji11.wordpress.com/50/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/brsinhji11.wordpress.com/50/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/brsinhji11.wordpress.com/50/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/brsinhji11.wordpress.com/50/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/brsinhji11.wordpress.com/50/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=50&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>भारतमें वैज्ञानिको की ठीक से क़द्र  नहीं होती</title>
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		<pubDate>Wed, 19 May 2010 02:23:02 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>

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		<description><![CDATA[                 भारतमें वैज्ञानिको की ठीक से क़द्र  नहीं होती है&#124; हम भारतीय ही वैज्ञानिको की सही कद्र  नहीं करते है तो हम दूसरोंसे क्या उम्मीद रख सकते है&#124; ये वेन्की अगर भारतमें होते तो कोइ उन्हें पहेचानता भी नहीं&#124; एसे और भी बहुत सारे वैज्ञानिक है जिनकी सहि कीमत  हुइ नहीं है&#124; ये तो अब्दुल कलाम ही खुशनसिब  है जिनको भारतकी जनता जानती है, और वोही [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=47&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/images4.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-48" title="images[4]" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/images4.jpg?w=116&#038;h=109" alt="" width="116" height="109" /></a>                 भारतमें वैज्ञानिको की ठीक से क़द्र  नहीं होती है| हम भारतीय ही वैज्ञानिको की सही कद्र  नहीं करते है तो हम दूसरोंसे क्या उम्मीद रख सकते है| ये वेन्की अगर भारतमें होते तो कोइ उन्हें पहेचानता भी नहीं| एसे और भी बहुत सारे वैज्ञानिक है जिनकी सहि कीमत  हुइ नहीं है| ये तो अब्दुल कलाम ही खुशनसिब  है जिनको भारतकी जनता जानती है, और वोही सच्चे हीरो होने पर भी हम उस महानुभाव को  हीरो मानते नहीं है| बीग बी अच्छे ईन्सान और अच्छे अभिनेता जरूर है पर हीरो नही है| भारतमें नेता-अभिनेताओकी ही कद्र  होती है| मिडिया वाले  भी अभिनेताओ की प्रशंसामें लगे रह्ते है| इसलिए जनता भी उन्ही लोगों को ही हीरो मानती रहेंगी|</div>
<div>              </div>
<div>           परमाणु विस्फोटके प्रयोगके बाद  विदेश से सहायता पर प्रतिबंध लगाया गया था| बहुत सारे प्रोजेक्ट संयुक्त रूपसे अमली करण हो रहे थे| एल.सी.ए. का प्रोजेक्टभी संयुक्त रूपसे था| जिन्हे वैज्ञानिको  ने बिना विदेशी  सहायता से पूरा किया| भारतके वैज्ञानिको  के वेतन के बारेमें प्रेसवाले क्या जानते  है? एक पी.एस.आइ. या पुलिस कर्मी से  कम वेतन होता है| मिडियाको पहेले ये नेता-अभिनेताको हीरो बनाना बंद करके जूठी प्रशंसा करनी छोडनी होगी| बिग बी के जन्मदिन मनाने के लिए बडी बडी केक पेस्ट्री बनाना और भव्य समारंभो का आयोजन करके उनका सन्मान करने वाले और  पूरा न्यूझपेपर उनके ही समाचरों से भरने वाले पत्रकारोंको किसी वैज्ञनिक का जन्मदिन क्युं याद नहीं आता? परमाणु विस्फोट के  प्रयोग मे  अब्दुल कलामके साथ कई और भी अनामी वैज्ञानिक थे| अब्दुल कलाम डिफेन्स लेब के सर्वोपरि अधिकारी थे,मिसाइल प्रयोग उनके अकेले की सफलता नहीं है|उनका योगदान ज्यादा था साथ में कइ अनामी वैज्ञानिक का भी योगदान रहा है तब कही जाके  ये महत्वपूर्ण कार्य सफल हुआ है| </div>
<div>           </div>
<div>            दंभी पत्रकार और मिडियावाले  सारा समय नेता अभिनेताके गुणगान गाने में व्यस्त रहेते  है और हीरो बनाते फिरते  है| वही मिडिया वैज्ञानिकोकी सही कद्र  ना होने की  फरियाद भी करते है| ये तो भाजपने थोडा अच्छा काम किया अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया| राजकिय फायदे के लिए रबर स्टेम्प जैसा होद्दा दे दिया| अगर सायन्स जैसे विभागमें केबिनेट मंत्री बनाया होता तो ज्यादा अच्छा होता| ऐसे ही एक गुजरातके नामी वैज्ञानिक साम पित्रोडाने  सिर्फ एक रूपिया वेतन लेके राजीव गांधीका हर घरमें हर गांवमें टेलीफोन और एस. टी. डी. पी. सी. ओ. और टी. वी.के नेटवर्कका सपना पूरा किया था| फिर भी राजीव गांधीके बादमें आइ हुइ सरकारने उनको  महत्वपूर्ण कार्य ना दे के उन्हें सिर्फ बिठाके रखा|</div>
<div>         </div>
<div>            भारतमें इन्फोटेककी शुरूआत गुजरातसे हुइ पर सबसे आगे बेंग्लोर और बादमें हैद्राबाद, पूना आ गए| इसमे गुजरात पीछे रहे गया| पहेले का सही हिन्दु धर्म सायन्टिफिक था| बादमें आये संप्रदायोके गुरुजनोने  अपने  फायदे के लिए सायन्सको दूर हटा दिया| शून्य, अंकशास्त्र, आयुर्वेद, योग,  प्लास्टिक सर्जरी, ज्योतिष के कारण ब्रह्मांड का ज्ञान, वैदिक गणित, कामसूत्र ये सब सायन्स नहीं तो क्या है? वैज्ञानिको कदर न करो कोइ बात नही, वो प्रसिद्धिके भूखे नहीं है| वो लोग तो उनके रिसर्च कार्य मे डुबे रहेते है| पर क्या हमार फर्ज नही है की उन लोगों को बिना तकलीफ कार्य करनेमें हम सहयोग दे?</div>
<br />Filed under: <a href='http://brsinhji11.wordpress.com/category/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/'>विवाद</a>, <a href='http://brsinhji11.wordpress.com/category/uncategorized/'>Uncategorized</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/brsinhji11.wordpress.com/47/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/brsinhji11.wordpress.com/47/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/brsinhji11.wordpress.com/47/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/brsinhji11.wordpress.com/47/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/brsinhji11.wordpress.com/47/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/brsinhji11.wordpress.com/47/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/brsinhji11.wordpress.com/47/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/brsinhji11.wordpress.com/47/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/brsinhji11.wordpress.com/47/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/brsinhji11.wordpress.com/47/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/brsinhji11.wordpress.com/47/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/brsinhji11.wordpress.com/47/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/brsinhji11.wordpress.com/47/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/brsinhji11.wordpress.com/47/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=47&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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	</item>
		<item>
		<title>द्रौपदी को ९९९ साड़ी और मूर्ति ने पिया दूध&#124;</title>
		<link>http://brsinhji11.wordpress.com/2010/05/09/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8c%e0%a4%aa%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a5%af%e0%a5%af%e0%a5%af-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%82/</link>
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		<pubDate>Sun, 09 May 2010 10:33:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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		<description><![CDATA[ द्रौपदी को ९९९ साड़ी और मूर्ति ने पिया दूध&#124;                 हमारे न्यू जर्सीमे एक साप्ताहिक निकालता है&#124;उसमे एक आर्टिकल पढ़ा&#124;भक्त नामदेव भगवान् विठठलजी  की मूर्ति के पास दूध रखते  है,और पीने के लिए प्रार्थना करते है&#124;प्रार्थना सुन ली जाती है,और मुर्तिने दूध पी भी लिया&#124;अमरीका में ऐसा लिखनेका?यहाँ आनेके बाद भी लोगन की मानसिकता में कोई फर्क नहीं आता&#124;बरसों पहेले अमेरिका आये भारतीय तो बहोत अंध श्रध्धालु है&#124;इसीलिए हर धर्म के हर पंथ के गुरुजन यहाँ भागे दौड़े चले आते है&#124;किसीने खा लिया मैं रह ना जाऊ&#124;                    इसी लेख में आगे पढ़ा की भगवान किसनजी को कुछ चोट आ गई&#124;सब रानीया आसपास दौड़ने लगी कहीसे कुछ दवाई या कपड़ा बेंडेज ढूंढने लगी&#124;किसीको याद नहीं आया की सब ने साड़ी पहनी है है,बेंडेज का लम्बा स्त्रोत्र &#124;पर द्रौपदी को [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=43&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/04/imagescaa9xt94.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-9" title="imagesCAA9XT94" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/04/imagescaa9xt94.jpg?w=104&#038;h=74" alt="" width="104" height="74" /></a> द्रौपदी को ९९९ साड़ी और मूर्ति ने पिया दूध|</div>
<div>                हमारे न्यू जर्सीमे एक साप्ताहिक निकालता है|उसमे एक आर्टिकल पढ़ा|भक्त नामदेव भगवान् विठठलजी  की मूर्ति के पास दूध रखते  है,और पीने के लिए प्रार्थना करते है|प्रार्थना सुन ली जाती है,और मुर्तिने दूध पी भी लिया|अमरीका में ऐसा लिखनेका?यहाँ आनेके बाद भी लोगन की मानसिकता में कोई फर्क नहीं आता|बरसों पहेले अमेरिका आये भारतीय तो बहोत अंध श्रध्धालु है|इसीलिए हर धर्म के हर पंथ के गुरुजन यहाँ भागे दौड़े चले आते है|किसीने खा लिया मैं रह ना जाऊ|</div>
<div>   </div>
<div>               इसी लेख में आगे पढ़ा की भगवान किसनजी को कुछ चोट आ गई|सब रानीया आसपास दौड़ने लगी कहीसे कुछ दवाई या कपड़ा बेंडेज ढूंढने लगी|किसीको याद नहीं आया की सब ने साड़ी पहनी है है,बेंडेज का लम्बा स्त्रोत्र |पर द्रौपदी को याद आ गया,जट से साड़ी फाड़ दी और किसनजिको बेंडेज लगादी|</div>
<div>    </div>
<div>                घाँव तो भर गया की कीसन महाराज ने बेंडेज को खोला और सब तार खोल कर गिन लिए|पुरे ९९९ हुए|  अब  ये रुण चुकाना जो है|कोई मौका मिले उसीकी चिंता लगी रहती है|कब ये रुण चुकता हो जाय?इतनी सारी साड़ियाँ कहासे लाये?अब तो अहमदाबाद में मिले भी सब बंद हो गई है,सूरत जाना पड़ेगा| और चांस मिल गया|मौका मिल गया|दुसाशन खड़ा था सभा में इसे नंगा करने|पाँच महारथी पतिदेव्स सर ज़ुकाए बैठे थे|जुए में हार गए थे द्रौपदीको|पैसे जो कम पड़ गए,और द्रौपदी की कीमत कोई वस्तू से ज्यादा तो थी नहीं|सब बाँट के तो खाते ही थे|भगवान को जो कर्ज चुकनेका मौका जो देना था|</div>
<div>     </div>
<div>                   भगवान् आये ऊपर माले पर खड़े रह गए|हाथ मेसे साड़ियाँ निकला रही थी|भगवान् भी आधे है,एक गोल प्रकाश के वर्तुल में पांव सब नदारद |सब साड़ियाँ पहनादी और थेंक यु बोला की अब रुण मुक्त हो गया| हसना ये आया की मै भी बचपन में मूवी देखा तो ये सब सच समज बैठा  था|उस ज़माने में साड़ियाँ कहा थी?रामायण महाभारत के काल में चर्म या कंतान के कपडे पहनते थे| न मिले  थी,न फेक्ट्रिया|</div>
<div>        </div>
<div>                   सीताजी को भी सुनहरी धब्बे वाले हिरन के चर्म के कपडे प्रिय थे|अब भगवान को उधारी चुकानेकी चिंता ज्यादा थी|९९९ साड़िया किस होलसेल मार्केट मेंसे लाये होंगे?और जब दुसाशन जब साड़ियाँ  निकाल रहा था तब मानो की द्रौपदी क्लोक वाइज़ घुमती थी या घुमा दी जाती थी तब एंटी क्लोक वाइज़ साड़ियाँ कैसे पहनादी जाती थी?</div>
<div>     </div>
<div>                   अब हुआ ये होंगा की द्रौपदी को नंगा करने पर तुला है दुसाशन ऐसे समाचार किसनजी को किसीने बताये होंगे|तो भगवान भागे दौड़े आये होंगे और धमकी दी होंगी की खबरदार ऐसा किया तो मार डालूँगा|और आधी नंगी की हुई द्रौपदीको कुछ लगाकर बचाया होंगा|श्री कृष्ण का प्रभाव ही ऐसा था,और सुदर्शन चक्र का डर|सब ये रहस्यमय हथियार से डरते थे|सब की बोलती बंद हो गई होंगी|कहानिया सही मायनेमे कहेनी चाहिए ताकि लोगो को असलियत का पता चले|</div>
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		<title>गंगा कभी प्रदूषित नहीं होती!!वाह भई!!क्या बात है!!!</title>
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		<pubDate>Wed, 05 May 2010 06:33:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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		<description><![CDATA[                                                               फेब्रुआरी ४,१९५४ कुम्भ के मेलेमे महानिर्वानी अखाड़े के साधू लोग स्नान करके आ रहे थे&#124;उनके नग्न शरीर के दर्शन मात्र से स्वर्ग में टिकट बुक हो सकती है,ऐसा मानके लोगों की भीड़ ने भगदड़ मचा दी&#124;उसी भीड़ में मारे गए ५०० से ज्यादा लोग तुरंत ही स्वर्ग में पहोच गए&#124;टिकट क्या बुक करनी?सीधा स्वर्ग नसीब हो गया&#124;सन १७६० के कुम्भ मेले में बैरागी साधुओ के बिच पहले कौन स्नान करे उसी के बारे में बड़ा विवाद पैदा हुआ&#124;कितने मारे गए?पुरे १८,००० से भी ज्यादा&#124;संसारी लोग तो जगड़ ते है&#124;पर ये बैरागी?  नो प्रॉब्लम एक अरब से ज्यादा होनेवाले जो है&#124;गुजरात के धोराजी गाँव में कुछ लोग मंदिर में कुचल कर मर गए&#124;                              जा के देख ले मेरे कुम्भ के मेले में सवा लाखसे भी ज्यादा साधू होते है&#124;देखा कितना महान है मेरा भारत?कितना धार्मिक है मेरा [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=39&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/imagescaqwsosg.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-37" title="imagesCAQWSOSG" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/imagescaqwsosg.jpg?w=130&#038;h=75" alt="" width="130" height="75" /></a>                                                               फेब्रुआरी ४,१९५४ कुम्भ के मेलेमे महानिर्वानी अखाड़े के साधू लोग स्नान करके आ रहे थे|उनके नग्न शरीर के दर्शन मात्र से स्वर्ग में टिकट बुक हो सकती है,ऐसा मानके लोगों की भीड़ ने भगदड़ मचा दी|उसी भीड़ में मारे गए ५०० से ज्यादा लोग तुरंत ही स्वर्ग में पहोच गए|टिकट क्या बुक करनी?सीधा स्वर्ग नसीब हो गया|सन १७६० के कुम्भ मेले में बैरागी साधुओ के बिच पहले कौन स्नान करे उसी के बारे में बड़ा विवाद पैदा हुआ|कितने मारे गए?पुरे १८,००० से भी ज्यादा|संसारी लोग तो जगड़ ते है|पर ये बैरागी?  नो प्रॉब्लम एक अरब से ज्यादा होनेवाले जो है|गुजरात के धोराजी गाँव में कुछ लोग मंदिर में कुचल कर मर गए|</div>
<div>  </div>
<div>                          जा के देख ले मेरे कुम्भ के मेले में सवा लाखसे भी ज्यादा साधू होते है|देखा कितना महान है मेरा भारत?कितना धार्मिक है मेरा भारत?जीतनी साधुओ की संख्या ज्यादा उतना भारत का गौरव ज्यादा|और इसी लिए भारत रौरव नर्क भुगत रहा है|ये लाखो साधू अन प्रोडक्टिव है|न तो  इन्हें आत्मज्ञान की परवा है,ना तो कोई वास्तु का उत्पादन करते है,नातो कोई सेवा या मिशनरी काम करते है|</div>
<div>      </div>
<div>                         संसार की जिम्मेवारी मेसे भागे हुए ये साधू,ये भीकारी लोग करोडो भारतीयों की मेहनत की आमदनी मुफ्त में खा जाते है|साधू तो चलता भला ,उस का कुल भी पूछ नहीं सकते|पुलिस भी ज्यादा तहेकिकात नहीं कर सकती|इसी वजह से हजारो क्रिमिनल्स साधू बन के घुमते रहते है|थोडा हिंदी बोलनेका,थोड़ी रामचरितमानस की चोपाई याद कर लेनेकी,हो गया काम,अब कोई पूछने वाले नहीं|</div>
<div>        </div>
<div>                              जानेमाने राम कथाकार बरसो पहले कुम्भ के मेले में कथा करने गए थे,तब सारे गुजराती लोग पागलो की तरह मेले में भागे थे|२० साल पहले १५ लाख का सिंहासन माने व्यासपीठ पर बैठ कर बापू बोल रहे थे|उनका पर्सनल टेंट एक लाख का बना था|</div>
<div>                 </div>
<div>                     कितने ही टॉयलेट कुम्भ की जगह बनाये गए होते है,पर लोग खुले में ही मलत्याग करते है|वाल्मीकि जातकी हरिजन स्त्रिया ये नर्क साफ करती है|२० साल पहले छतरपुर की गंगुबाई ये मल का नर्क साफ करके जब कुम्भ समाप्त हो जाता तब अपने गाँव जाती थी तब गाँव वाले ढोल नगारे से स्वागत करते थे|अब जो तुम्हारा नर्क साफ़ करे उसका सन्मान तो होना ही था|अब ये तो अछूत जात तुम्हे  तो स्पर्श हो जाये तो मरना बरोबर लगे|ये तो जरुर स्वर्ग में गई होंगी,क्योंकि गंगा को शुध्ध करने में प्रदान जो दिया था|और हम लोग?कहा जायेंगे?स्वर्ग या नर्क?</div>
<div>          </div>
<div>               कितने ही लोग स्नान करे गंगा कभी  अशुध्द नहीं होनेवाली ऐसा माननेवाला भी  एक वर्ग  हमारे भारत में है|अब पाँच करोड़ लोग स्नान करेंगे तो क्या वो जयादा अशुध्द नहीं होंगी? किसीने लिखा था हजारो लोग स्नान करते है तो गंगा का पानी इलेक्ट्रीफाय होता है,एनर्जिवाला होता है|मौनी अमास के दिन स्नान गंगा में करने से कुँआरी कन्या को अच्छा वर प्राप्त होता है,अदालत के जगड़े समाप्त हो जाते है|कहा गया विज्ञान?</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>                 </div>
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		<title>राम तेरी गंगा मैली हो गई!!!पापीओके पाप धोते धोते!!!!</title>
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		<pubDate>Sat, 01 May 2010 16:13:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupendrasinh Raol</dc:creator>
				<category><![CDATA[विवाद]]></category>

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		<description><![CDATA[राम तेरी गंगा मैली हो गई!!!पापीओके पाप धोते धोते!!!!        *सन १८६४ के किसी साल में लगभग १४६ वर्ष पहले अद्वैतवादी योगिराज स्वामी तोतापुरी महाराज के पवित्र मुखसे शब्द निकल पड़े थे &#8220;राम तेरी गंगा तो बहोत मैली हो गई है&#8221;&#124;ये शब्द कहे थे श्री रामकृष्ण परमहंसजी को&#124;हरिद्वार से कलकत्ता आते आते गंगा कितनी मैली [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=brsinhji11.wordpress.com&amp;blog=13259505&amp;post=35&amp;subd=brsinhji11&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/images8.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-36" title="images[8]" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/images8.jpg?w=124&#038;h=93" alt="" width="124" height="93" /></a><a href="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/imagescaqwsosg.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-37" title="imagesCAQWSOSG" src="http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/05/imagescaqwsosg.jpg?w=130&#038;h=75" alt="" width="130" height="75" /></a>राम तेरी गंगा मैली हो गई!!!पापीओके पाप धोते धोते!!!!</div>
<div>       *सन १८६४ के किसी साल में लगभग १४६ वर्ष पहले अद्वैतवादी योगिराज स्वामी तोतापुरी महाराज के पवित्र मुखसे शब्द निकल पड़े थे &#8220;राम तेरी गंगा तो बहोत मैली हो गई है&#8221;|ये शब्द कहे थे श्री रामकृष्ण परमहंसजी को|हरिद्वार से कलकत्ता आते आते गंगा कितनी मैली हो गई थी,उसका सबूत था १४६ साल पहले बोले गए ये शब्द|</div>
<div>  </div>
<div>                      * तोतापुरी महाराज श्री रामकृष्ण परमहंस(स्वामी विवेकानन्द के गुरु)के गुरु थे उनकी अद्वैत की साधना के अंतर्गत|अबतक श्री रामकृष्ण अपने को अधुरा समजते थे,इन्ही महान गुरुकी छत्रछाया में रामकृष्ण ने साधना की और निर्विकल्प समाधिका अनुभव किया और पूर्णता प्राप्त की|ऐसे प्रतापी गुरु के मुंह से निकले शब्द को टायटल बनके महान शो में राजकपुर्जी ने मूवी बनाया था|और वो कितना सफल हुआ था सब जानते है|बहोत सफलता मिली थी|</div>
<div>      </div>
<div>                  * कोई मूल भारतीय लेखक महाशय अंग्रेजीने कहानिया लिखते है|गंगाजी में लोग मल विसर्जन करते है ऐसा लिखकर भारतीय संस्कृति की अवगणना करते है|बहोत लोगो की आत्मा दुखी होती है,मेरी भी होती है|विदेश की बहोत सारी जानेमानी व्यक्तिया गंगा के प्रति श्रध्धा और मान रखती है|गंगा की स्वच्छता के लिए हम भारतीयों से ज्यादा विदेशी लोग ज्यादा चिंतित है|फिर भी कोई विदेशी गंगा की अशुध्धता के बारे में बात करते हुए हँसता है तो हम लोग क्रुध्द हो जाते है|</div>
<div>     </div>
<div>                 *  भूल हमारी ही है|पहले हमारा दोष ही देखना चाहिए|गंगा का पानी पीने तो ठीक नहाने के लिए भी योग्य नहीं रहा है|वो तो मानना ही पड़ेगा|हमारे धर्म में स्वच्छता और पवित्रता को जोइंट  किया गया नहीं है|दोनोके मापदंड अलग अलग है|अभी कोई प्रसाद निचे गिर गया है तो भी पवित्र है,लोग उठाकर खा लेते है|स्वच्छता और पवित्रता को साथ में जोड़ देनी चाहिए थी|उसका सब पाप गुरुओके सर जाता है|</div>
<div> </div>
<div>                   * अब जिसको पवित्र मानते हो उसीमे मलत्याग कैसे कर सकते हो?इस बारे में हमारा ही कोई भारतीय लेखक ही अच्छी तरहसे बता सकता है|किसी गोरी चमड़ी के तो ख्याल में ही ना आए की किसी भी नदी में मलत्याग हो सकता है|दुःख इस बात का होता है की हमारी गन्दी आदते विदेशी लोग जान जाते है|हमारे महानता के खयालोमे कोई बाधा डालता है| </div>
<div>         </div>
<div>                 *मुझे ज्यादा गुस्सा धार्मिक लोगो पर,गुरु लोगो पर आता है की वस्तू पवित्र है ऐसा ख्याल इन्ही लोग डालते है,तो वो ही चीज स्वच्छ होनी चाहिए ऐसा क्यों नहीं शिखाते? गंगा को शुध्ध करना बहोत अच्छी बात है,पर ऐसा होगा क्या?प्रजा के जनताके ब्रेन में सब कोंशियाश माइंड में है ही नहीं की स्वच्छता है वहा ही पवित्रता हो सकती है|सरकार कितने ही प्रयत्न करे आन्दोलन चलाये कोई फर्क नहीं पड़ने वाला|फर्क तभी पड़ सकता है, जब मोर धेन २५,००० सम्प्रदायोके गुरुजन जाहिर करे,फतवा निकाले की जहा स्वच्छता है वहा पवित्रता है|तो एक ही सप्ताह में गंगा शुध्ध हो सकती है,वरना नहीं|</div>
<div>        </div>
<div>                 *इसी वजह से गुजराती ब्लॉग जगत के सदस्य भाई श्री अरविन्द अडालजा ने प्रमाणिकतासे शक्य सभी  धर्म गुरुओको एक पत्र लिखा था|लेकिन किसीने उत्तर देना गनीमत नहीं समजा था|एक श्री दंताली(गुजरात) के स्वामी सच्चिदानंदजी ने जवाब दिया था|</div>
<div>       </div>
<div>                 *  एकबार मै कुछ पड़ोस वालो  के साथ नर्मदा स्नान के लिए गया था|स्नान करके स्वर्ग के लिए टिकिट जो बुक करानी थी|मैंने देखा सब एक ही जगह स्नान करते है साबुन लगा लगा के|पास में कुछ भैंसे भी स्नान के साथ मलविसर्जन कर रही थी|मैंने तो टिकट बुक करने का सोचना बंद कर दिया,स्नान किया नहीं|सनकी लगा औरो को|नर्मदा किनारे आये और बिना पुन्य कमाके वापस जा रहे है|मेरे आश्चर्य के बिच पड़ोस वाली बहनजी ने थोडा पानी हाथ में लेके गले में उतार दिया |  </div>
<div>     </div>
<div>                   * हम गंदे है औए कोई गन्दा कहे उसमे बुरा क्या लगाना?उठके स्नान करके स्वच्छ होने में कोई रोकता है क्या?सिर्फ गंगा ही नहीं हर नदी पवित्र है,हर नदीको पवित्र के साथ स्वच्छ रखने की जिम्मेवारी हमारी है|हमारे लिए जीतनी गंगा पवित्र है,उतनी ही पवित्र नाइल है इजिप्त के लिए,एमेज़ोन  अमरीका के लिए,हडसन न्युयोर्क के लिए और जर्सी सिटी के लिए,भरूच के लिए नर्मदा और सूरत के लिए तापी,साबरमती अहदाबाद के लिए| </div>
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