आमिरखान के नाम एक पत्र |

स्त्री भ्रूण हत्याके विषय पर आमिरखान का  टीवी शो ” सत्यमेव जयते” देखा | दिल दहेला देनेवाला शो था | मैंने एक पत्र आमिर के नाम लिखा है |

आमिरभाई सलाम |

 हम ह्युमन  मेमल सस्तन प्राणी है | मेमल समूहमे जीनेके लिए इवोल्व हुई है | हमारे पास मेमल ब्रेइन होता है | जिसको लिम्बिक सिस्टम कहा जाता है | २०० मिलियन सालोसे इवोल्व हुआ मेमल ब्रेइन हमें प्राणियोके पाससे इनहेरन्ट मिला है | मेमल सर्वाइवल स्किल बचपनसे आसपासके माहोल और मिले अनुभवसे शिखते है | एक  न्यूरल नेटवर्क तैयार होता है | जो सारी जिंदगी हमारी सेवा करता है | हम भारतीय लोग दुनियाके सबसे बड़े हिपोक्रेट लोग है | हम बचपन से शिखते आये है की लड़का कुलदीपक है | हजारो सालोंसे भारतके समाजकी ब्ल्यू प्रिंट बिगड़ चुकी है | सड चुकी है | हमारी धार्मिक मान्यताए ये ब्ल्यू प्रिंट बिगाड़नेका  काम कर रही है | तर्क और बुध्धि एवेरेज भारतियके बसकी बात नहीं है | बचपनसे बच्चो के मनमे ये बात घुसनी चाहिए की ये सब गलत है | हमारे ९९.९९% लोग रेशनल है ही नहीं | सोचते ही नहीं है | सड़े हुए समाजके सड़े हुए डॉक्टर्स है, जज है, नेता है, धर्मगुरु है, शिक्षक है | जज भी बचपनसे सुनता आया है की लड़का कुलदीपक है | कोई गाँधी बचपनमे मिले न्यूरल पाथवे को बदलता है | ये न्यूरल  राजमार्ग बदलना मुश्किल  होता है | हम  भ्रष्टाचार करते है, करप्शन करते है, क्योंकि हमने बचपनमे हमारे मातापिताको करप्शन करते देखा है | करप्शन गलत है ऐसा लगता ही नहीं है | ये सर्वाइवल स्किल है जो हम बचपनसे ब्रेइनमें हार्ड वायरिंग करके हम बड़े हुए है | ये वायरिंग बदलेनेके लिए हमें नए न्युरोंस काममे लेने  पड़ेंगे, नया न्यूरल मार्ग बनाना  पडेगा  | बहोत मुश्किल है भारतमे  ये सब बदलना | क्योंकि हम भारतीय ऐसी बकवास मान्यताओं को धर्म समजते है | करप्शन  गलत है,ऐसा मनमे घुसना तो चाहिए ? करप्शन  रोकना है ? तो सबसे पहले भगवानके आगे नालियेर (कोकोनट) चढ़ाना बंध करना पडेगा, प्रसाद रखना बंध करना पडेगा | वैसे बच्चिया बचाना चाहते हो ? तो नारी एक वस्तु (कोमोडिटी) नहीं है ऐसा शिखाना चाहिए | बेटियाँ कुलदीपिका है ऐसा दिमागमे  उतरना चाहिए | अब जबकी पत्नीको  जुएमें रखने वालो को हम धर्मराज  समजते रहेंगे और प्रेगनंट  पत्नीको बनमे  जंगलमे  भेज  देनेवालोको  भगवान समजते रहेंगे तबतक  ये बहोत मुश्किल है |  लेकिन आपने ये जो लोगोको जागृत करनेका काम शुरू किया है तो ह्मारी ढेर सारी शुभकामनाये |

I Love You ,,,,कुछ खट्टा कुछ मीठ्ठा

 I Love You ,,,,कुछ खट्टा कुछ मीठ्ठा 
मुझे एक दिन जोब पर  मजाक करने का मन हुआ। एक मित्रने उसके घर फोन किया किसी काम के लिए। मै जरा मजाकके मुडमें था। मित्रका नाम प्रदीप पटेल, ४६ सालके, बरोडा(गुजरात) के नजदीकके गांवके है।
मेंने पूछाः घर पे फोन करते हो वाइफ को?
उन्होंने कहाः हां।
‘फोन में बात पूरी हो जाए तब I Love You कहेना’ ।
‘फिर तो पूरी रात सो नहीं पाएगी’॥
‘ऐसा क्युं?
‘२० साल हो गए पहेलीबार I Love You सुनेगी तो उसे पूरी रात नींद नहीं आयेगी’।
सब लोग खूब हंसने लगे| वो कहेने लगे मेंने २० सालमें कभी भी ऐसा कहा ही नहीं है। तो मैने पूछा की वाइफने तो एसा आपको कहा होगा ना? तो कहेने लगे उसने भी कभी नहीं कहा है॥ मेंने फिर पूछा किसी गर्लफ्रेन्ड को तो कहा होगा ना? तो कहा की गर्लफ्रेन्डको तो बहुतबार कहा था। पर वो पत्नी नहीं हुइ थी। दूसरेकी पत्नी बन गइ।
दूसरे एक ५५ सालके मित्र ज्योतिन्द्र पटेल को सवाल किया। दादा दोडके! आपने कभी I Love You अपनी वाइफको कहा है? वो ज्यादा एनर्जेटिक है इसलिए हम उन्हें दादा दोडके कह के  के मान देते है।
‘इसमें क्या कहेना?’
‘कोइ दिन तो कहा होगा ना?’
नहीं कभी नहीं सब जानते है वो मेरी वाइफ है और में उसका घरवाला ‘।
‘आप भी ना कैसे हो?’
‘इसमें क्या है  उसे पता है की में उसे छोडके कहीं नहीं जानेवाला और जाउंगा तो वापस आनेवाला ही हुं, वो मुझे प्रेम करती है और में उसे प्रेम करता हुं उसमें  क्या कहेना?’
फिरसे सब हंसे। दूसरे एक भाइने कहा उनकी वाइफको पता है कि ये खोटा सिक्का है कहींनही चलनेवाला वापस ही आएगा। एक नया लडका है २३ सालका सचीन पटेल  मैंने उसे पूछा, सचीन कितने साल हुए शादी को?
‘दो साल’
‘अमरिका आए कितने टाइम हुआ?
‘सिर्फ पांच महिने हुए है’
‘आपने कभी वाइफ को I Love You कहा है?’
‘कहा है बहुत बार कहा है पर यहां की वाइफ का कोइ विश्वास नहीं’
‘अरे भाइ क्युं एसा कहेता है?’
‘अरे भाइ मेरी वाइफ २० साल से यहां रहेती है। यहां की लडकीयोंका क्या भरोसा? कब निकाल दे क्या पता’।
सब लोग बहुत हंसे की पेटमें दर्द होने जैसा हुआ। सचिनकी खुदकी पेथोलोजीकल लेब थी। सब लोग कहेते है क्या लेने आया होगा यहां? पेड(देवादार अमेरिक) परसे हरी नोटो तोडने दूसरा क्या?
दूसरे पीयूष पटेल है ४० सालके हुए कहेने लगे मेंने तो अभी शादी ही नहीं की इसलिए मुझे तो पूछना ही नहीं। बिना विसा के अमेरिकामें आये है इसलिए अब  भारत जा नहीं सकते है शादीके लिए, अगर शादीके लिए जाए तो वापस नहीं आ सकते। उमर बढती जाती है। कोइ लडकी पसंद नहीं आती या किसी लडकी को वो पसंद नहीं आते।
और एक सतीश मास्तर है भरुचके वो भी लगभग ५५ साल के है कहेते है हमारे जमाने में कौन एसा कहेता था ? मैने कभी नहीं कहा। मैने कहा मास्तर कभी तो कहेना चाहिए ना? तो कहेने लगे यार इसमें क्या कहेना? मित्रो मेरा मजाकमें हुए इन्टरव्यु थोडेमें ज्यादा कहेता है। क्या कहेता है ये मेरे मित्र प्रतिभावके रूपमें कहे ऐसी आशा है।
क्या पत्नीको I Love You कहेना चाहिए? कितने भी साल शादीको हुए हो फिर भी कहे सकते है? भले ही सारी रात नींद ना आये कहेनेमें क्या प्रोब्लेम?
ये तो अच्छा हुआ किसीने मुझे ये सवाल नहीं पूछा।

गुरु गुलामी!!!!५० लाख साधु? बापरे!! अधधध!!!

 गुरु गुलामी!!!!५० लाख साधु? बापरे!! अधधध!!!
         *गुलाम मानसिकताको लोग कोलोनियल माइन्ड कहेते है। अंग्रेज  २२० वर्ष भारत पर राज करके गये। इसलिए प्रजाकी मानसिकतामें अंग्रेजी  और अंग्रेजोकी प्रति गुलामी खूनमें आ गइ  है। पर गुरुगुलामी तो प्रजाके अचेतन मनमें समा गइ  है और संतानोको वारसेमें जीन्समें भी देते जाते है।
                   किसीको कोइना कोइ गुरुके बगैर जैसे चलता ही नहीं। ईन्दिरा गांधी हो या जवाहरलाल के गांधीजी या  किसी भी नेता, सब गुरुके पास आशीर्वाद और  सलाह लेनेके लिए दौड जाते है। दूसरे देशके नेता साधुओकी सलाह लेने नहीं जाते, इसलिए वो भारत से बलवान है, और आगे है। साधुओंकी सलाह लेके देशका भला कहां हुआ? देश तो हजार साल तक गुलाम ही रहा है, गरीब और कायर ही रहा है। भीखारीओंकी सलाह से कभी देश बलवान हो सकता है भला? जो मुर्ख होते है वो देशको चलाने के लिए साधू ओंकी सलाह लेने दौड जाते है। हा कोइ अपवाद हो शकटा  है, जैसे की चाणक्य। पर एसे अपवाद कितने? चंद्रगुप्तका साम्राज्य बलवान था क्योंकी चाणक्यने जासूसी संस्थाका महत्व समजाया था। राज्यके जासूस सीधे चाणक्यके पास माहिती देने  चले जाते थे| बाग्लादेशका १९७१में अस्तित्व हुआ उस युद्ध को आधा तो  भारतकी ‘रो’ नामक जासूसी संस्था के कारण ही जीते थे। इस ‘रो’ को छोटा करके लगभग निष्क्रिय बना देने का महापाप श्रेष्ठ जाने जाते मोरारजी देसाइने किया था। कच्छ जितना छोटा इजराएल  देश को कोइ नहीं दबा सकता इसका कारण उनकी जासूसी संस्था ‘मोसाद’ है।
 
            सबको आशीर्वादसे काम चलाना  है। कोइ महेनत नहीं करनी, कर्मका नियम है की कर्मका फल मिलता ही है, कर्म भगवानको भी नहीं छोडते तो फिर आशीर्वादकी क्या जरूरत? अगर प्रार्थना किये  खराब कर्मो या की गइ भूलमेंसे मुक्तिके लिए करते हो तो फिर कर्म के नियम का क्या अर्थ ? बाकी प्रार्थना करते ही रहो कोइ फर्क नहीं पडेगा। भगवान महावीर इस कर्मके नियम को जानते थे, इसलिए जिंदगीमें कभी प्रार्थना नहीं  की थी। भारतमें लगभग ५० लाख साधु है एसा गुजराती दिव्यभास्करमें किसी आर्टीकलमें पढा था। जो ये सच्चा हो तो?
        
                ये ५० लाख साधु कुछ काम नहीं करते|कीसी चीजका उत्पादन नहीं करते, ना ही कोइ सेवा बेचते है। मुफ्तमें प्रजाके पैसे से मजा करते है। एक साधू के पीछे कमसे कम हररोजके ५० रू. खर्च होता है ऐसा मान ले , क्यूंकी ये साधु भूखे नहीं रहेते है।  पैसे कौन देता होगा? ५० रू. से ज्यादा खर्च करते होगें क्योंकी बीडी और गांजेका खर्च कौन देता होगा? उनके खानेका, चायका, दूधका, भगवे वस्त्रका, फलाहार इन सबके लिए वो लोग तो कमाने जाते नहिं है। तो इनका रोजका सादा हिसाब भी गिने तो एक साधुके पीछे ५० रू. के हिसाब से गिने तो ५० लाख साधुओंके पीछे हररोजके २५०० लाख रपिया हुआ। और सालके ३६५ दिनके ९१२५ करोड रूपिया खर्च होते होंगे। ये तमामपैसे प्रजाकी जेबसे जाते है। ये हिसाब तो सीधे सादे फेमस नहीं है एसे साधुओंका खरच जो आम जनताके सिर पे आता खर्च है।जानेमाने गुरुओं तो जनताके करोडो रूपिया एंठते होगे, कुछ भी किये बिना। भारतकी इकोनोमीके लिए बोज है, ये साधू  संस्था। जो देशके विकासमें कोइ काममें नहीं आती। बिना साधुओंके देशका विकास अच्छा होगा, इकोनोमी सुधरेगी। जनता के महेनतके पैसे बचेगें.
               जिसको काम करना नहीं है वो ही भगवे वस्त्र पहेनके साधु बन जाते है। उनका काम हो गया उनको जिंदा रखनेके जिम्मेदारी जनताकी। बहोत  सारे लोग कहेते है की दो चार साधुके कारण सारी साधु संस्थाको बदनाम नहीं करना चाहिए। मेरा कहेना है की दो चार अच्छे साधुओंके कारन पूरी निष्क्रिय साधुसंस्था का बोज क्युं उठाना? स्वामी विवेकानंद जैसे सच्चे साधु और गुरु कितने? और जो सच्चे है वो तो संसारमें रहेके भी भक्ति कर शकते है। पूरा ॠषि जगत शादीशुदा थे। कितने को तो दो पत्नीआं भी थी| कोइ कोइका मानना है की ये साधुओंको स्त्रीआं विचलित करती है। पर विचलित हो जाए एसी साधुता किस कामकी? या फिर सत्रीओंकी भावनाओंको बहेलाके साधू  खुदकी दबाइ हुइ छूपि वासनाको संतोषते तो नही है ना?     
      
                  एक ही रामकथा को बारबार कहे के करोडो ऋपिया जमा करनेवाले बापुओंकी कमी नहीं है ये देशमें। ज्यादा मंदिरो बनाके जनताके करोडो रुपिया पथ्थरोमें डालते है। एक सोमपुरा फेमिलीका भला करने के लिए बाकी जनताकी जेब से पैसे खाली होते है। ये सोमपुरा फेमिली मंदिर नहीं बनायेंगे तो दूसरा काम ढूंढ लेंगे, भूखे नहीं रहेंगे। उनकी कारीगरी मंदिरो के बजाय सोसायटी या एपार्टमेन्ट बनानेमें उपयोग करेंगें। मजदूरोंको काम मिलता रहेगा।
कुंभके मेलेमें गंगा नदीमें स्नान करते वक्त लाखों साधुओंकी फोटो खुशी खुशी छापते है। और शिवरात्रीके वक्त गांजा पीते साधुओंके फोटो भी अखबारवाले छापते है सौर पुण्य कमातेहै। लोग भी खुश होते है, कैसा महान देश है हमारा। दोचार बुद्धु गोरे आ जाये तो लोग ज्यादा खुश हो जाते है, कैसी महान संस्कृति!!! साक्षर लोग  फटाफट लिखते है की एसी महान साधु संस्था है हमारी की गोरे भी मानते है। एक साक्षरने तो लीख दिया की पश्चिमके लोग अपनी संजीवनी विद्यामें विश्वास रखते है। कोमामें चले जाते है वो वापस होशमें आते है पर मरा हुआ जिवित हो सकते है? कोमामें गया  होशमें आता होगा और मानते होगेंकी संजीवनीके प्रयोगसे जिन्दा हुए।
            
              समजनेकी बात है जहां चोरी ज्यादा होती है वहां पुलिसकी जरुरत ज्यादा रहेती है। एसा जहां अधर्म ज्यादा वहां धर्मकी और साधुओं,गुरुओंकी जरूरत ज्यादा।  चोर अपना धंधा चालु रखनेके लिए पुलिसको भ्रष्टाचारी बनाते है,एसेही अधर्म चालु रखनेके लिए साधु, गुरुको भ्रष्टाचारी बनाना पडता है या बनना पडता है। चोर ही पुलिस बन जाए तो किसीको पकडनेकी चिंता ही नहीं।  अधर्मी और कामचोर साधु,गुरु बन जाए तो  सच्चे गुरु खो जाते है। अभिनयके निष्णात गुरु सच्चे गुरु होनेकी एक्टींग करेंगे, प्रवचन देगें, ह्रदयद्रावक कथाए कहेंगे और भोली जनताके करोडो रूपिया आश्रमो बनानेमें लगायेंगे| बादमें उनके लिए झगडे होंगें, खून भी हो जाते है। ये साधुसंस्था देशके लिए नुकशानकारक है। गुरुगुलामी मानस  प्रजाके लिए ज्यादा नुकशानकारक है।*

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