About Me

बरसोसे चल रहा था मनमे विचारोका तुमुल युध्ध|अंध विश्वास,अंधश्रध्धा और अवैज्ञानिक मान्यताओ के विरुध्ध लिखना पसंद है|मै किसीकी धार्मिक भावनाओको ठेस पहुचाने नहीं आया हूँ| पर बात बात में धार्मिक भावनाओको ठेस पहुँच ना जाय ऐसा सोचके सच लिखनेसे क्या डरना?कड़वे सच में कितनी सुगर डाल सकते है?ज्यादा सुगर मिलाने से सच भी सच नहीं रहता|मै हु भूपेन्द्रसिंह रतनसिंहजी राओल,गावँ माणसा,जिल्ला गांधीनगर,गुजरात|चापोत्कट(चावड़ा)वंश के राजपूत घराने से हूँ|हाल पिस्काटावे,न्यू जर्सी अमरीका में रहता हूँ|ज्यादा क्या बताऊ?मेरे शब्द ही मेरी पहेचान होंगी|
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सित 19, 2011 @ 13:32:52
प्रिय श्री भूपेन्द्र सिंह रतन सिंह जी राओल, गाँव माणसा, जिला गांधीनगर, गुजरात
विषय: आपका आलेख (कुछ सुधार के साथ) हिन्दी मासिक इंडिया इनसाइड में प्रकाशित करने के सम्बन्ध में।
महोदय,
ब्लाॅग पर आपका आलेख देखा। महसूस किया। अच्छा लगा। किंचित आपत्तियों के साथ। मसलन हम संवैधानिक दायरे को न तोड़े तो बेहतर है। अनुशासित व्यक्ति ही अनुशासन का पाठ करने का अधिकारी होता है। क्षमा। चाहूँगा की यह आलेख मुद्रित अक्षरों में हमारे पाठकों तक पहुंचे। बहुत सारे ऐसे पाठक है जो पढ़ते हैं। खूब पढ़ते है। पर ब्लाॅग पर छपे हुये शब्दों को। इंडिया इनसाइड अपने माध्यम से अपने पाठकों को वह सब भी परोसना चाहती है जो कहीं छपे न हो। जो सिर्फ आभाषी दुनियां में तैर रहे हो। चुँकि छपना अंर्तताना माध्यमों से ज्यादा शाश्वत है। चिरस्थायी है और भरोसेमन्द भी। आपके विचार तीखे है, शरारती भी कभी-कभी यह छलाँग उस वृत्त को भी पार कर जाती है जहां हमे नहीं जाना चाहिये।
आशा करता हूँ कि आप अवश्य चाहेंगे की यह आलेख इंडिया प्रकाशित हो। इसे हमारे ईमेल पर अपनी सहमति देना चाहेंगे।
साधुवाद,
अरुण सिंह
सम्पादक इंडिया इनसाइड
editor.indiainside@gmail.com
Mob. : 09450196408
Lucknow, Uttar Pradesh
INDIA