अमेरिकन गंदगी भारत में?

         ब्लोग जगतमें कहीं पढ़ा था किसी के अभिप्राय  में की अमरीका से हररोज गंदगी भारतमें आती है | शतप्रतिशत सच  बात है | उसके लिए कौन जिम्मेदार ? क्या अमरीका जिम्मेदार है ? होगा मेरी ना नहीं है पर ग्लोबल  वर्ल्ड के व्यापार जगतमें कितनो को मना  करा सकते  है | पेप्सी,कोला या फेंटा को निकाल देनेके बाद भी वापस आ गई उसके लिए कोंन जिम्मेदार है हम भी उतने ही जिम्मेदार है |
     
                बरोडामें सिर्फ मेरे घर के सामने ही कोई गंदकी डाले तो में लड  पड़ता था |  घर के आगे घरमें नहीं |अगर में उस वेस्ट को  किसी और काम में ले लेता तो ? तो हररोज लोग मेरे घरके सामने गंदकी डाल जाते | और अगर में उस कचरे के बदलेमें डालने वाले को कुछ रुपये  देता तो उन लोगों को और भी मजा आता और भी जगह से भी  कचरा लाके मुझे बेचते और पैसे  बनाते| अब उसी कचरे को सचीन और अमिताभ साहब प्रमोट करते है तो में ज्यादा से ज्यादा लूँगा और मेरे पडोसी और सचिन और बच्चन सब लोग कितने खुश होके पैसे  बनाते और मेरा क्या होता? घाटा, अब पूरी बात को समजे तो उसमे दोष किसका ज्यादा है  पडोसी का? या उसी कचरे को अच्छी चीज माँनके  स्वीकार किया और उसे प्रमोट करके अपने स्वार्थ के लिए पेसे बनाने वाले  तेंदुलकर और बच्चन साहब का दोष? बादमे में आवाज उठाऊ की  अम्रीका से हररोज गंदकी भारतमे डाली जाती है उसका क्या अर्थ? उसको लेते ही क्यों हो?
 
                भारत की जनता खुदको ज्यादा बुद्धिमान समजती है तो फिर क्यों ये गंदकी को प्रमोट करनेवालों को हीरो मानती है और उंकी पूजा करती है? बच्चन साब बीमार होते है तो पूरा भारत  मानता है की उनके बिना भारत का उद्धार ही नहीं और मंदिरों में जा के पूजा, प्रार्थना करते है | किसी सैनिक या त्रासवाद के सामने लड़नेवाले वीरगति प्राप्त करनेवाले को कोई याद क्यों नहिं करता? संसद पर हुए  हुमलेमे मरने वाले की आठवी वरसी में कीसी को वक्त नहिं मिला की उन लोगोंकी आत्माकी शांति  की लिए प्रार्थना करने की और उनके परिवार जनको याद करनेकी किसीने परवाह  की ? उन लोगोकी श्रध्धानजली के अवसर पर किसी आगेवान नेताको या सचिन या बच्चन साहब  को वक्त ही नहीं मिला| सचे हीरो के लिए किसी के पास वक्त नहीं है|
   
         पेप्सी या  कोक से  बाथरुम-टोइलेट अच्छे साफ़  होते है ट्राय करके देखना| क्यूँ? उसका पी.एच.ज्यादा है| अमरीकामें अगर में सोडा हाथमे  लेता हू तो मेरे बेटे मेरे मुझे  आँखे दीखाते है| यहां पेप्सी, कोला कोई नही कहेता सोडा कहेते है | यहां मेरा बेटा जो क्रिकेट खेलता है वो कभी भी पेप्सी या कोक नही पीता और मुझे भी नहिं पीने देता | पेप्सि के एक एक घूंट दन्त के इनेमल को नुकशान करता है| तो हमारे लीवर और पेट की क्या हालत होती होगी? अब कोई कितना भी प्रचार करे क्या खाना क्या पीना ये हमें तय करना है| कोई तो जहर भी बेचे को लड्डू हमें तय करना है की क्या खरीदना | सिर्फ एक दिन लोग समजकर पेप्सी-कोला नहीं पिएगे तो?  दुसरे ही दिन पेप्सी-कोला की कम्पनी खुद सब कूछ समेटने लगेगी   ही और एक हप्ता नहीं पिएगी तो?अपने आप कंपनी वापस चली जाएगी |   
      
              कोई हीरो सामने से पैसे देकर कहेगा की मुझे एड में लो फिरभी ना  कहेगी और भा गा जाएगी | पर ऐसा होनेवाला तो है नहिं अपने भगवान जाहेरखबरों में से पैसे कमाते है फिर उनका क्या होगा?  हम लोग पागलों की तरह क्रिकेट, फिल्म देखते है और  जाहेरखबरोंमें से प्रेरणा लेके जंकफ़ूड और कोल्ड ड्रिंक्स खातेपिते है इसलिए तो वो लोग तो पैसे बनाते है | और इसलिए तो एड कम्पनी उनलोगों को करोडो रूपया देती है| इसलिए क्रिकेट खेल से ज्यादा फ़िक्षिंग बन गया है|  हम मेंच देखते वक्त हमारा बी.पी. बढ़ाते है एक फोर और सिकस लगायेंगे तो भारत जित जाएगा | पर उन लोगों को किसीकी परवा  नहीं होती| हम लोग अगर देखना बंद कर देंगे तो फिक्सिंग अपने आप बंद हो जाएगी.|
                 जंक फ़ूड को गालीया देते है पर कौन कहेता है की खाओ ? कोई हमको घरसे पुलिश की तरह पकड के नहीं ले के जाता मेक्डोनालड़में ? हम नहीं जाएगे तो वो लोग हमारी राह नहीं देखेंगे और चले जाएँगे | एक पैसेका नुकशान  नहीं सहेंगे |
श्री कान्ति भट्ट  विदेशी कंपनी कारगिल और  मोंसाटो की  बात हरवक्त करते है की ये लोग भारतमें हाइब्रिड बिज और बी.टी. ब्रिंजल लाते है और कहते है की उसमे क्वोलिटी या स्वाद नहीं है | बात सही है पर में कहेता हूँ की ऐसा  कहेना चाहिए की खरीदो मत और खाओ मत एक सीजन नहीं खाएंगे तो उसके बिना मर नहीं जाएँगे | और उसका असर पड़ेगा | दुसरे सिजनमे बिज खरीदेगे नहीं तो कम्पनी अपने आप चली जाएगी| एक ही सीजन काफी है| पर ये संभव नहीं है क्योंकि सब को ये समजाये कौन ? किसी धर्मगुरु ये कहे की ब्रिंजल खाना पाप है तो ही ये संभव है | पर हो शकता है की वो कम्पनी फिर धर्म्गुरुको ही पैसे दे के चुप कर दे तो ? गुरूजी कहेंगे बैंगन  तो खाने चाहिए उससे स्वर्ग मिलता है| श्री कान्ति भट्ट का मै कुछ बातोंमें बड़ा आलोचक भी हूँ |
 
            यहाँ में एक स्पष्टता करना चाहूँगा की तेंदुलकर और बच्चन साहब का नाम पढ़कर कोई अपना मन न दुभाये | ये तो एक एक्जाम्पल है सबके नाम तो कहाँ लिखूं ? तेंदुलकर और बच्चन साहब अपने क्षेत्रमें महान है| पर अनिल कपूर ज्यादा महान है क्योंकि उन्होंने कभी ऐसी एड करके करोडो रुपया नहीं कमाया | शायद उन्होंने कोई एड की हो ऐसा जाननेमें नहीं आया|
सार ये की गंदकी उपयोग आप  करते हो इसलिए   वो लोग बेचते है लेना बंद करदेंगे तो बेचना बंद हो जायेगा | फीर अमरीका  से गंदकी आना बंद हो जाएगी |
                जानकारीके लिए पेप्सी कम्पनी के इन्द्रा नूयी भारतके है| उनका २००८ का कुला वेतन १,३३,८२,०३५.०० डोलर था | और आजके १ डॉलर ४६ के  हिसाबसे ६१,५५,७३.६१०.०० रूपी होता है |  ये आपके  लीवर, गुर्दा और दांत बिगाड़नेकी कीमत है|  और दुनिया के तीसरे नंबर के  पावरफुल लेडी में उनकी गिनती है | पर मुझे उसमें उनका कोई दोष नहीं दिखता दोष अपना है |और हम इस बात का गर्व महेसुस  करते है |
 
 

5s टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. manoj sharma
    मई 23, 2011 @ 07:54:09

    aaj nahin aaj to suruaat hai phir kabhi likhunga tippani doonga,pahle hindi likhna to seekh jaaun.

    Reply

  2. loksangharsha
    जून 06, 2010 @ 07:04:49

    nice

    Reply

  3. mahendra mishra
    मई 27, 2010 @ 22:27:12

    सटीक कथन…आभार

    Reply

  4. girlsguidetosurvival
    मई 27, 2010 @ 21:52:52

    Aap ki khari khari ne dil khush kar diya. …गुरूजी कहेंगे बैंगन तो खाने चाहिए उससे स्वर्ग मिलता है|

    Ek Bangali laghu katha yaad aa gayi. Ek raja ne khansama se poochha ki aaj kya banaya hai khane mein. Usne kaha baigan. Raja ne thoda naak sikoda to mantri jhat bol pada Baigun yeh bhi ki shak hai Be- gun. Koi gun nahin hai. Tabhi raja bol pada mujhe pasand hai. Mantari jhat bol pada Baigan to sabjion ka raja hai. Yeh ek shak aisi hai jis ke sar pe taj hai. So haal in dharm guruon ka hai…

    …पर अनिल कपूर ज्यादा महान है क्योंकि उन्होंने कभी ऐसी एड करके करोडो रुपया नहीं कमाया | Shayad kisi ne ad offer hi na ki ho. Mile to har koi behti ganaga mein haath do le…

    Rahi baat consumption ki kuchh moorkh logon ko is baat mein shaan jan padti hai ki voh menmanwaji pepsi cola aadi se karte hein. Is shreni mein ex MIL aati hein agar ghode ke naal thukegi to yeh medaki bhi apana paawon aage karegi chahe ek hi maar me pran pakheru ho jayen. Yeh to padhe likhe logon ke haal hein…

    Hum thehre dehati pardes mein bhi chhach hi pite hein aur suti (cotton) hi pahante hein.

    Bharolji,

    शराब के नए नए ठेके खुले हैं… yeh sabhi theke Indian made foreign liquor ke hein. Kya aapne gaur kiya hai ki yeh sabhi theke bas addon ke paas hein ki tankhan ghar pahunche hi nahin. Aur to aur yeh theke vetan diwas pe special discount bhi dete hein.

    Peace,

    Desi Girl

    Reply

  5. Rajeev Bharol
    मई 27, 2010 @ 21:06:23

    मेरे विचार से Globalization के दौर में यहाँ की चीज़े वहां और वहां की चीज़े यहाँ तो आयेंगे हीं. हाँ हम चाहें तो कोक पेप्सी पीना बंद ज़रूर कर सकते हैं.

    मज़े की बात है की हम इन चीज़ों का विरोध करते हैं लेकिन जब भी मैं भारत जाता हूँ तो देखता हूँ की शराब के नए नए ठेके खुले हैं. नए नए शराब के अहाते और पहले से ज्यादा कम उम्र के बच्चे शराब पीते हुए!

    Reply

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