राम तेरी गंगा मैली हो गई!!!पापीओके पाप धोते धोते!!!!

राम तेरी गंगा मैली हो गई!!!पापीओके पाप धोते धोते!!!!
       *सन १८६४ के किसी साल में लगभग १४६ वर्ष पहले अद्वैतवादी योगिराज स्वामी तोतापुरी महाराज के पवित्र मुखसे शब्द निकल पड़े थे “राम तेरी गंगा तो बहोत मैली हो गई है”|ये शब्द कहे थे श्री रामकृष्ण परमहंसजी को|हरिद्वार से कलकत्ता आते आते गंगा कितनी मैली हो गई थी,उसका सबूत था १४६ साल पहले बोले गए ये शब्द|
  
                      * तोतापुरी महाराज श्री रामकृष्ण परमहंस(स्वामी विवेकानन्द के गुरु)के गुरु थे उनकी अद्वैत की साधना के अंतर्गत|अबतक श्री रामकृष्ण अपने को अधुरा समजते थे,इन्ही महान गुरुकी छत्रछाया में रामकृष्ण ने साधना की और निर्विकल्प समाधिका अनुभव किया और पूर्णता प्राप्त की|ऐसे प्रतापी गुरु के मुंह से निकले शब्द को टायटल बनके महान शो में राजकपुर्जी ने मूवी बनाया था|और वो कितना सफल हुआ था सब जानते है|बहोत सफलता मिली थी|
      
                  * कोई मूल भारतीय लेखक महाशय अंग्रेजीने कहानिया लिखते है|गंगाजी में लोग मल विसर्जन करते है ऐसा लिखकर भारतीय संस्कृति की अवगणना करते है|बहोत लोगो की आत्मा दुखी होती है,मेरी भी होती है|विदेश की बहोत सारी जानेमानी व्यक्तिया गंगा के प्रति श्रध्धा और मान रखती है|गंगा की स्वच्छता के लिए हम भारतीयों से ज्यादा विदेशी लोग ज्यादा चिंतित है|फिर भी कोई विदेशी गंगा की अशुध्धता के बारे में बात करते हुए हँसता है तो हम लोग क्रुध्द हो जाते है|
     
                 *  भूल हमारी ही है|पहले हमारा दोष ही देखना चाहिए|गंगा का पानी पीने तो ठीक नहाने के लिए भी योग्य नहीं रहा है|वो तो मानना ही पड़ेगा|हमारे धर्म में स्वच्छता और पवित्रता को जोइंट  किया गया नहीं है|दोनोके मापदंड अलग अलग है|अभी कोई प्रसाद निचे गिर गया है तो भी पवित्र है,लोग उठाकर खा लेते है|स्वच्छता और पवित्रता को साथ में जोड़ देनी चाहिए थी|उसका सब पाप गुरुओके सर जाता है|
 
                   * अब जिसको पवित्र मानते हो उसीमे मलत्याग कैसे कर सकते हो?इस बारे में हमारा ही कोई भारतीय लेखक ही अच्छी तरहसे बता सकता है|किसी गोरी चमड़ी के तो ख्याल में ही ना आए की किसी भी नदी में मलत्याग हो सकता है|दुःख इस बात का होता है की हमारी गन्दी आदते विदेशी लोग जान जाते है|हमारे महानता के खयालोमे कोई बाधा डालता है| 
         
                 *मुझे ज्यादा गुस्सा धार्मिक लोगो पर,गुरु लोगो पर आता है की वस्तू पवित्र है ऐसा ख्याल इन्ही लोग डालते है,तो वो ही चीज स्वच्छ होनी चाहिए ऐसा क्यों नहीं शिखाते? गंगा को शुध्ध करना बहोत अच्छी बात है,पर ऐसा होगा क्या?प्रजा के जनताके ब्रेन में सब कोंशियाश माइंड में है ही नहीं की स्वच्छता है वहा ही पवित्रता हो सकती है|सरकार कितने ही प्रयत्न करे आन्दोलन चलाये कोई फर्क नहीं पड़ने वाला|फर्क तभी पड़ सकता है, जब मोर धेन २५,००० सम्प्रदायोके गुरुजन जाहिर करे,फतवा निकाले की जहा स्वच्छता है वहा पवित्रता है|तो एक ही सप्ताह में गंगा शुध्ध हो सकती है,वरना नहीं|
        
                 *इसी वजह से गुजराती ब्लॉग जगत के सदस्य भाई श्री अरविन्द अडालजा ने प्रमाणिकतासे शक्य सभी  धर्म गुरुओको एक पत्र लिखा था|लेकिन किसीने उत्तर देना गनीमत नहीं समजा था|एक श्री दंताली(गुजरात) के स्वामी सच्चिदानंदजी ने जवाब दिया था|
       
                 *  एकबार मै कुछ पड़ोस वालो  के साथ नर्मदा स्नान के लिए गया था|स्नान करके स्वर्ग के लिए टिकिट जो बुक करानी थी|मैंने देखा सब एक ही जगह स्नान करते है साबुन लगा लगा के|पास में कुछ भैंसे भी स्नान के साथ मलविसर्जन कर रही थी|मैंने तो टिकट बुक करने का सोचना बंद कर दिया,स्नान किया नहीं|सनकी लगा औरो को|नर्मदा किनारे आये और बिना पुन्य कमाके वापस जा रहे है|मेरे आश्चर्य के बिच पड़ोस वाली बहनजी ने थोडा पानी हाथ में लेके गले में उतार दिया |  
     
                   * हम गंदे है औए कोई गन्दा कहे उसमे बुरा क्या लगाना?उठके स्नान करके स्वच्छ होने में कोई रोकता है क्या?सिर्फ गंगा ही नहीं हर नदी पवित्र है,हर नदीको पवित्र के साथ स्वच्छ रखने की जिम्मेवारी हमारी है|हमारे लिए जीतनी गंगा पवित्र है,उतनी ही पवित्र नाइल है इजिप्त के लिए,एमेज़ोन  अमरीका के लिए,हडसन न्युयोर्क के लिए और जर्सी सिटी के लिए,भरूच के लिए नर्मदा और सूरत के लिए तापी,साबरमती अहदाबाद के लिए| 
         

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