“सुनने की कला”
30 अप्रै 2010 4s टिप्पणियाँ
in विवाद
* २५०० वर्ष पहले भगवान् बुध्ध ने कहा था जिसे सुनने कला आती नहीं है,उस का शरीर बैल की तरह बढ़ता है पर प्रज्ञा नहीं बढ़ती|बाद में सन.१९१२ में फ्रेंच मनो वज्ञानिक आल्फ्रेड विनए ने जाहिर किया की मानव की शारीरिक और मानसिक आयु अलग अलग होती है|हम अपने से बड़े लोगों का आदर करते है,की भाई आयु के साथ अनुभव जन्य ज्ञान की बढौती हुई होंगी|लेकिन अगर उन्होंने सुननेकी कला नहीं शिखी होती तो?
*एक छोटासा बच्चा जब जन्म लेता है वो बोलनेको शिखता है सुनके|अगर वो बच्चा पैदाइशी बहरा है तो चाहे स्वर तंत्र अच्छा ही क्यों न हो वो बोलना नहीं शिखता|वो सब सुनता है,ब्रेन में माहिती भंडार जमा होता है,फिर कही जाके बोलना शिखता है|वैसे तो हम सब सुमते है,पर सुननेकी कला किसे आती है? ज्यादातर लोगोको अपनी सुनानेमे ही रस होता है,किसी की सुननेमे कोई रस होता नहीं|
* स्वामी विवेकानंदजी ३२ या ३३ साल की उम्र में चल बसे|इतनी छोटी सी शारीरिक उम्र में स्वामीजी की मानसिक उम्र कितनी?३००,५०० या १००० साल?और उनका मेमरी पावर?कहते है उनके जैसी स्मरण शक्ति किसी और के पास नहीं थी|
* आदी शंकराचार्य भी छोटी उम्र में चल बसे थे|८ साल के थे तब सन्यास लिया था|८ साल के बच्चे में कितनी बुध्धि होती है?सारे हिंदुस्तान के पंडित जनों को हराया था|कितने पुस्तक लिखे?अद्वैत वाद की घोसणा की|जो आज के वैज्ञानिक लो ऑफ़ सिंग्युलारीटी कहते है|८ वि शताब्दी में पैदा हुए थे उस ज़माने में कोई ८ साल का बच्चा सन्यास की बाते करे?आजका हिन्दू धर्म सिर्फ ये खा सकते है,ये नहीं खा सकते खाने पिने में ही अटक गया है|द्वैत माने दो और अद्वैत माने सिर्फ एक ही| मै ही ब्रह्म हूँ|अहम ब्रह्मास्मि|सर्व खलु इदं ब्रह्म|यही तो लो ऑफ़ सिंग्युलारीटी है|
*अच्छे वक्ता बनने से पहले अच्छे श्रोता बनना जरुरी है|
* दुसरे वर्ल्ड वोर के समय पर अमेरिकन सैनिक की सरेराश आयु सिर्फ १३ साल की ही थी|
* हम कितना सुनते है वो जरुरी नहीं है,हम कितना ध्यानपूर्वक सुनते है वो जरुरी है|
* अब बैल तरह शरीर ही बढ़ाना है?या फिर बुध्धि भी!!!!

![images[2]](http://brsinhji11.files.wordpress.com/2010/04/images21.jpg?w=535)

Ahmedabad Date
हाल ही की टिप्पणियाँ